अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा बढ़ी

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में पिछले 4 महीनों में हिंसा ख़ौफ़नाक रूप से बढ़ी है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की त्रैमासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़कों पर हुए बम धमाकों की घटनाएं पिछले साल के मुक़ाबले इस साल 94 फ़ीसदी बढ़ी हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि आत्मघाती धमाके औसतन एक हफ़्ते में तीन हो रहे हैं और कुल आत्मघाती धमाकों में से आधे देश के दक्षिणी हिस्सों में हो रहे हैं.
दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद शहर में तैनात अमरीकी सैनिकों की संख्या में की गई बढ़ोतरी और फ़रवरी में शुरू किए गए नेटो के एक बड़े अभियान के दौरान ये रिपोर्ट आई है.
अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने अफ़गा़निस्तान में पिछले दिसंबर में 30 हज़ार और सैनिकों की तैनाती की थी.
नेटो ने फ़रवरी में ऑपरेशन मुश्तरक नाम से हेलमंद प्रांत में जो बड़ा अभियान शुरू किया है, वह सन 2001 में अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के पतन के बाद का अब तक का सबसे बड़ा अभियान बताया जा रहा है.
रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि दक्षिणी क्षेत्र में हिंसा में हुई इस बढ़ोतरी के लिए नेटो के अभियान को आंशिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान मे हत्या के मामलों मे भी 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है.
कहा गया है कि तालेबान और अन्य चरमपंथी गुट अफ़ग़ान अधिकारियों की हत्या के मामलों मे लगातार सफल हो रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि चरमपंथियों के हमलों में अब और आधुनिकतम तकनीक का इस्तमाल किया जा रहा है जो इस बात का सबूत है कि अल क़ायदा से जुड़े चरमपथियों के स्थानीय नेटवर्क की क्षमताएं बढ़ती जा रही हैं.












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