उज़्बेकों ने तेल डिपो उड़ाने की धमकी दी

किर्गिस्तान में चल रहे तनाव के बीच उज़्बेकों ने दक्षिणी किर्गिस्तान में एक तेल डिपो पर कब्ज़ा कर लिया है और धमकी दी है कि अगर अंतरिम सरकार ने बल प्रयोग किया तो डिपो उड़ा दिया जाएगा.
पिछले एक हफ़्ते से ओश प्रांत में लगातार हिंसा हो रही है और अधिकारी इस प्रांत में में प्रवेश करने के लिए बातचीत कर रहे हैं.
इस प्रांत में ही किर्गिस्तान का अधिकतर तेल भंडार मौजूद है. नस्ली हिंसा शुरु होने के बाद अब तक कम से कम दस लाख लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं. हिंसा में अब तक मरने वालों की संख्या 179 तक पहुंच चुकी है.
पलायन करने वालों में अधिकतर उज़्बेक महिलाएं और बच्चे हैं जो पड़ोसी देश उज़्बेकिस्तान में शरण ले रहे हैं. अब तक इन घटनाओं में 1870 लोग घायल हो चुके हैं.
अमरीका ने मध्य एशिया में अपने शीर्ष कूटनीतिज्ञ राबर्ट ब्लेक को भेजा है जो राजधानी बिशकेक में शुक्रवार और शनिवार को बातचीत करेंगे.
किर्गिस्तान के अंतरिम नेताओं का कहना है कि अंतरिम सरकार के नेता अप्रैल महीने से सत्ता में आने के बाद अपना शासन स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
अप्रैल महीने में राष्ट्रपति कुरमानबेक बाकियेव को सत्ता से हटा दिया गया था.
बातचीत जारी
उज़्बेकों के एक प्रतिनिधि ने बीबीसी से कहा है कि इतने दिनों से चल रही हिंसा के बाद उन्हें स्थानीय सरकार और किर्गीज़ सेना पर बिल्कुल भरोसा नहीं है और वो उम्मीद कर रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र शांति सेना इस मसले पर हस्तक्षेप करे.
बीबीसी के रेहान दिमीत्री ओश में हैं. दिमीत्री के अनुसार उज़्बेकों का कहना है कि वो शांति और सुरक्षा की गारंटी चाहते हैं.
किर्गीज़ पक्ष के एक सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि बातचीत हो रही है और कोशिश इसी बात की है कि और मौतें न हों.
हिंसा से प्रभावित जलालाबाद क्षेत्र में कार्यकारी गवर्नर बेकतूर असानोव का कहना है कि स्थिति अब शांतिपूर्ण लग रही है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि सभी दुकानें और बाज़ार खुले रहेंगे.आज दुःख का दिन है और हम अपने मृतकों को दफन करेंगे.कोई झगड़ा नहीं होने दिया जाएगा. हम स्थिति पर नज़र रख रहे हैं.’’
इस बीच संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने उज़्बेकिस्तान की सीमा पर अनुमानित 75000 शरणार्थियों के लिए राहत सहायता पहुंचानी शुरु की है.
बुधवार को एक विमान उज़्बेक शहर आंदिजान में क़रीब 800 तंबू लेकर उतरा है.
रेड क्रास के मध्य एशिया मामलों के प्रभारी पास्केल मियेज़ वागनर का कहना है कि अभी भी कई लोग हैं जो अपने घरों में फंसे हुए हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘लोग घरों से निकलने से डर रहे हैं. लोग घायल हैं और उनके पास मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं.’’












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