पश्चिम बंगाल में वाममोर्चे की करारी शिकस्त, तृणमूल ने जीती केएमसी (लीड-2)
राज्य में तृणमूल कांग्रेस ने 26 जिला नगरीय निकायों में कब्जा जमा लिया है जबकि वाम दलों के खाते में इनके 17 निकाक गए हैं। कांग्रेस को कुल सात निकायों में कामयाबी मिली है।
प्रदेश के शहरी मतदाताओं ने वामपंथी मोर्चे को तगड़ झटका दिया है। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हो सका था और इसलिए दोनों साथ चुनाव नहीं लड़ पाए थे।
चुनाव के नतीजे तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ी सफलता है। इससे पहले चुनावी सर्वेक्षणों में बराबरी का मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही थी।
केएमसी के 141 वार्डो में तृणमूल अब तक कुल 90 में जीत दर्ज कर चुकी है। वाम मोर्चा को महज 33 सीटें मिली हैं, कांग्रेस 10 और भाजपा तीन सीटों पर चुनाव जीती है।
वर्ष 2005 से केएमसी पर वाम मोर्चा का कब्जा था। वर्ष 2000 से 2005 तक केएमसी की सत्ता तृणमूल कांगेस के पास थी। इससे पहले इस नगरीय निकाय में 1985 के बाद से 2000 तक वाम मोर्चे का ही कब्जा था।
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बिधान नगर निगम में भी बहुमत हासिल की है, यहां कुल 25 सीटों में से तृणमूल ने 16 सीटें जीत ली हैं।
तृणमूल ने बर्धमान की मेमारी और बीरभूति की बोलपुर सीट पर जीत दर्ज की है। इसके साथ ही उसे उत्तरी 24 परगना जिले के खरदाह, बारानगर और नहाटी में कामयाबी मिली है।
वाम मोर्चे को हुगली जिले के बल्ली और कूच बिहार जिले के तूफानगंज व दिनहटा में जीत मिली है। कटवा नगर निगम की सीट कांग्रेस के खाते में गई है।
जीत के बाद बनर्जी ने बुधवार को नेताजी सुभाषचंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर कहा कि वह बंगाल के लोगों को बधाई देती हैं। वामदलों ने प्रदेश में शासन करने का अधिकार खो दिया है और प्रदेश में जल्द से जल्द विधानसभा के चुनाव कराए जाने चाहिए।
चुनाव परिणामों के बाद तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने पूरे कोलकाता में जीत का जश्न मनाया।
रविवार को हुए इन चुनावों को प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। प्रदेश में 1977 के बाद से सत्ता पर काबिज वाममोर्चा की सरकार के लिए यह समय सबसे ज्यादा संकट का माना जा रहा है।
रविवार को कोलकाता नगर निगम सहित 81 नगर निकायों के लिए हुए चुनावों में 70 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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