इजरायली कार्रवाई की जांच की मांग, भारत ने की निंदा (राउंडअप)
सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव को इजरायल ने अस्वीकार्य और मध्य-पूर्व में स्थिरता व शांति के खिलाफ बताते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय समूह के पाखण्डपूर्ण दोहरे मापदण्ड वाले नजरिए का परिणाम बताया है, वहीं भारत सरकार ने इस सैनिक कार्रवाई को 'सेना का दुरुपयोग' बताते हुए इसकी निंदा की है।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र ने घटना की शीघ्र, निष्पक्ष, विश्वसनीय और पारदर्शी जांच की मांग की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, "सेना के इस दुरुपयोग को किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता, हम इसकी निंदा करते हैं। हम मारे गए और घायल लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं।"
प्रवक्ता ने कहा, "गाजा के लिए सहायता ले जा रहे जहाजों पर हुई कार्रवाई में मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए भारत शोकाकुल है।"
बयान में कहा गया, "यह हमारा दृढ़ विश्वास है कि इस क्षेत्र में शांति और सौहाद्र्र की स्थापना शांतिपूर्ण बातचीत से ही की जा सकती है न कि बल प्रयोग से।"
गाजा पट्टी में मानवीय सहायता सामग्री ले जा रहे जहाजी बेड़े पर इजरायली नौसेना की कार्रवाई की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को इजरायल ने अस्वीकार्य और मध्य-पूर्व में स्थिरता और शांति के खिलाफ बताया है।
इजरायल के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अपने एक बयान में कहा कि इजरायल के विदेश मंत्री एविगडोर लिबरमेन ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से टेलीफोन पर हुई बातचीत में कहा, "यह इजरायल को लेकर चिंता जताने वाले अंतर्राष्ट्रीय समूह का पाखण्डपूर्ण और दोहरे मापदण्ड वाला नजरिया है, इसके लिए खेद जताया जाना चाहिए।"
सोमवार तड़के सुबह नाकेबंदी की गई गाजा पट्टी में मानवीय सहायता ले जा रहे फिलिस्तीन समर्थकों के छह जहाजों के बेड़े पर इजरायली नौसेना द्वारा की गई छापेमारी में सहायता सामग्री ले जा रहे समूह के नौ लोग मारे गए थे।
लिबरमेन ने मून से कहा कि जब पिछले महीने विभिन्न घटनाओं में थाईलैंड, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक और भारत में 500 लोग मारे गए थे तब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय चुप रहा लेकिन इजरायल की सुरक्षात्मक कार्रवाई की निंदा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि समर्थकों से झगड़े के दौरान जब इजरायली सैनिकों पर लोहे की छड़ों, डंडों और चाकुओं से हमला हुआ तो उन्हें अपनी सुरक्षा का अधिकार था।
इस घटना में मरने वालों में तुर्की के नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा थी। तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में इजरायल की जमकर आलोचना की।
सुरक्षा परिषद द्वारा जारी बयान में इजराइल से जहाजों को छोड़ने, नागरिकों को स्वतंत्र करने और गाजा पट्टी पर की गई नाकेबंदी को खत्म कर वहां तक सहायता पहुंचने देने के लिए कहा है। परिषद ने यह मांग भी की है कि इस घटना में जो भी लोग मारे गए हैं उनके शव उनके देशों को सौंप दिए जाएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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