अक्षरधाम हमला : तीनों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार
न्यायमूर्ति आर. एम. जोशी और न्यायमूर्ति के. एम. ठाकर की एक पीठ ने तीनों दोषियों की सजा बरकरार रखने और तीन अन्य की सजा की अवधि बढ़ाने संबंधी फैसला सुनाया। अदालत ने पोटा अदालत के फैसले के खिलाफ की गई अपील को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि दोषियों को पता था कि वह कितना बड़ा अपराध करने जा रहे हैं। उन्हें इसके अंजामों के बारे में भी पता था।
पोटा की अदालत ने जुलाई, 2006 में अपना फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की गई थी।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यद्यपि कि तीनों दोषियों का आपराधिक रिकार्ड नहीं रहा है लेकिन वे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों के समर्थन से चलने वाली आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त जरूर थे।
अदालत ने आरोपियों की स्वीकारोक्ति संबंध बयानों और अन्य गवाहों के आधार पर कहा कि ये आरोपी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने में शामिल थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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