एनसीईआरटी की किताब में 'राघव रेडियो' की प्रेरणादायी कहानी

पटना, 1 जून (आईएएनएस)। बिहार के एक अशिक्षित युवक ने एक रेडयो स्टेशन शुरू कर उसके जरिए पोलियो, एड्स और अन्य मुद्दों पर सामाजिक संदेशों का प्रचार-प्रसार किया लेकिन इस रेडियो स्टेशन को गैरकानूनी तौर पर चलाने के कारण उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

अब इसी युवक की यह प्रेरणादायी कहानी एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तक के माध्यम से अन्य युवाओं को प्रेरित करेगी।

राघव ने अपनी 25-26 वर्ष की आयु में 'राघव रेडियो' शुरू किया था। उनकी व उनके रडियो की कहानी को शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 12वीं की किताब 'भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास' में प्रकाशित किया है।

किताब में राघव का सामाजिक विकास के आदर्श के रूप में वर्णन किया गया है। राघव ने वैशाली जिले के मंसूरपुर गांव में 'राघव रेडियो' शुरू किया था। किताब में बताया गया है कि राघव को रेडियो शुरू करने के बाद कैसी-कैसी मुसीबतों का सामना करना पड़ा था।

वर्तमान में राघव राजस्थान के अजमेर जिले में एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन 'बेयरफुट कम्युनिटी रेडियो स्टेशन' में परियोजना प्रमुख के बतौर काम कर रहे हैं। उन्होंने फोन पर आईएएनएस से कहा कि एनसीईआरटी की किताब में उनकी कहानी प्रकाशित होने से लोगों को और खासकर युवाओं को समाज में कुछ अलग करने की प्रेरणा मिलेगी।

किताब में बताया गया है कि राघव का जन्म खेत में काम करने वाले श्रमिक के परिवार में हुआ था और उसके माता-पिता बहुत गरीब थे इसलिए उसे पढ़ाई-लिखाई नहीं करा सकते थे।

एक साल के दौरान इकट्ठे किए हुए यंत्रों और उपकरणों के साथ राघव ने रेडियो स्टेशन शुरू किया था। गांव वालों के बीच यह रेडियो स्टेशन जल्दी ही बहुत लोकप्रिय हो गया था।

यह रेडियो स्टेशन मुजफ्फरपुर, वैशाली और सारन जिलों में एक सामुदायिक रेडियो सेवा संचालित करता था। इस पर स्थानीय बोली में स्थानीय खबरें और दृष्टिकोण प्रसारित किए जाते थे।

इस पर हिंदी गीतों और समाचारों के अलावा इलाके में हो रहे अपराधों की सूचना भी दी जाती थी। एड्स जागरूकता, पोलियो उन्मूलन, साक्षरता पहल से संबंधित कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे। इस पर गुमशुदा लोगों की खबर दी जाती थी जबकि स्थानीय समारोहों और त्योहारों की जानकारी भी दी जाती थी और यह सब कुछ एकदम निशुल्क उपलब्ध था।

मीडिया में इस रेडियो की खबर को प्राथमिकता मिलने के बाद राघव बहुत लोकप्रिय हो गया। केंद्रीय संचार मंत्रालय ने भी इस ओर ध्यान दिया।

वर्ष 2006 में मंत्रालय ने चैनल की वैधानिकता पर रिपोर्ट मांगी। राघव के पास रेडियो चलाने का कोई लाइसेंस नहीं था। वह गरीब था और लाइसेंस की फीस नहीं दे सकता था जबकि उसे यह भी पता नहीं था कि इस तरह से रेडियो चलाना गैर कानूनी है।

'राघव रेडियो' बंद हो गया। जिला अधिकारियों ने कहा कि भारतीय टेलीग्राफ कानून के उल्लंघन के चलते इसे बंद किया गया है। सरकार ने राघव को दोषी पाते हुए कुछ समय के लिए गिरफ्तार कर लिया लेकिन वह मंसूरपुर गांव के लिए हीरो था।

बाद में राघव की मदद के लिए कई स्वयं सेवी संगठन आगे आए आौर उन्होंने उसे व्यावसायिक प्रशिक्षण दिलवाया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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