खो रही है चिट्ठी लिखने की कला

जज़्बातों को अलफाज़ देती, कागज़ के कुछ पन्नों में सिमटी चिट्ठी और चिट्ठी लिखने की कला मानो ख़त्म सी होती जा रही है.
ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले करीब 50 फ़ीसदी बच्चे ठीक से नहीं जानते कि चिट्ठी कैसे भेजी जाती है.
सात से लेकर 14 साल के बच्चों से पूछा गया कि क्या उन्होंने पिछले एक साल में पत्र लिखने की कोशिश की है तो चार में से एक बच्चे ने न में जवाब दिया.
जबकि पिछले एक हफ़्ते में इनमें से 50 फ़ीसदी से ज़्यादा बच्चों ने ईमेल किया है या सोशल नेटवर्किंग साइट पर संदेश भेजे हैं. ये सर्वेक्षण ब्रिटेन के 1188 बच्चों में किया गया.
बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामले की विशेषज्ञ सू पामर कहती हैं, जब आप ख़ुद कलम से कुछ लिखते हैं तो इसके ज़रिए लिखने वाला ये दर्शाता है कि वे उस रिश्ते को
अपना वक़्त दे रहा है. तभी तो हम पुराने पत्रों को संभाल कर रखते हैं.
लेकिन अध्ययन से पता चलता है कि बहुत से बच्चे न तो पत्र लिखते हैं, न ही उन्हें किसी का पत्र मिलता है. आँकड़ों के मुताबिक पाँच में एक बच्चे को कभी किसी ने पत्र नहीं लिखा.
करीब 45 फ़ीसदी बच्चों ने कहा कि या तो उन्हें पत्र लिखना बिल्कुल नहीं आता या वे पक्के तौर पर नहीं कह सकते.
ये सर्वे अप्रैल में चैरिटी वर्ल्ड विज़न ने करवाया था.












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