अजमेर विस्फोट: दो न्यायिक हिरासत में

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में अजमेर की एक अदालत ने अजमेर दरगाह विस्फोट के मामले में गिरफ्तार दो अभियुक्तों, चंद्रशेखर और देवेंद्र गुप्ता को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
अदालत ने बाद में गिरफ़्तार किए गए एक और अभियुक्त लोकेश शर्मा को एक जून तक लिए पूछताछ के लिए पुलिस को सौंप दिया है.
इन तीनों को राज्य पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने शुक्रवार को अदालत में पेश किया था.
राज्य में वर्ष, 2007 में अजमेर स्थित दरगाह में धमाके हुए थे. इसमें तीन लोग मारे गए थे और 15 लोग घायल हो गए थे.
पुलिस ने लंबी जाँच पड़ताल के बाद पिछले माह ही इस मामले में कथित तौर पर एक हिन्दू संगठन से जुड़े देवेंद्र गुप्ता को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया और उसके बाद दो और गिरफ्तारियाँ कीं.
हालांकि पूछताछ कई और लोगों से भी की गई है.
पुलिस का आरोप है कि देवेंद्र गुप्ता और उनके साथी चंद्रशेखर इन धमाकों में शामिल थे.
पुलिस के मुताबिक़, अजमेर निवासी देवेंद्र अरसा पहले मध्य प्रदेश चले गए थे और वहां से झारखंड में सक्रिय हो गए.
पुलिस कहती है कि इन लोगों ने मोबाइल फ़ोन के ज़रिये इन धमाकों को अंजाम दिया.
लेकिन गिरफ़्तार किए गए लोगों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
पुलिस ने मध्य प्रदेश के एक उद्योगपति को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया.
पुलिस देवेंद्र को लेकर झारखंड भी गई थी.
जाँच एजेंसियों के मुताबिक़ इन लोगों ने फ़र्ज़ी पहचान के ज़रिए झारखंड और बंगाल से मोबाइल फ़ोन के सिम कार्ड जुटाए और विस्फोट में काम में लिए.
राज्य के गृहमंत्री शांति धारीवाल बीबीसी से कह चुके हैं कि पकड़े गए लोग सीधे-सीधे एक प्रमुख हिन्दू संगठन से जुड़े हैं.
उनके मुताबिक़ इसमें एक गुजरात निवासी एक साधु भी शामिल है जो घटना के बाद से ही भूमिगत है.
उनका कहना है, "हमें बीजेपी शासित राज्यों, गुजरात और मध्य प्रदेश में जाँच में कोई सहयोग नहीं मिल रहा है. पुलिस ने मोबाइल के सिम कार्ड से इन लोगों का पता लगाया. यह जानकारी हादसे के तुरंत बाद मिल गई थी, फिर बीजेपी जब सता में थी तब उन्होंने क्यों नहीं जांच आगे बढ़ाई?"
राज्य बीजेपी अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी इन आरोपों को ग़लत बताते हैं और कहते हैं कि कांग्रेस सरकार राजनीति कर रही है.












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