उड़ीसा में 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया (लीड-1)

जिला अधिकारी वी. के. पांडियन ने आईएएनएस को बताया, "रामिया, पटना और पोदामपेटा गांवों को खाली कराकर वहां के करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।"

उधर, सैकड़ों राहत एवं बचाव कर्मियों ने आपदा से निपटने का अभ्यास किया। बंगाल की खाड़ी के ऊपर उठे चक्रवाती तूफान से राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की आशंका है।

विशेष राहत आयुक्त निकुंज संडारे ने आईएएनएस को बताया कि गंजम जिले के कई स्थानों पर बचाव कर्मियों ने अभ्यास किया क्योंकि यह क्षेत्र चक्रवात से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है।

राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासनों को सतर्क कर दिया है हालांकि तटीय जिलों में ही चक्रवात का मुख्य असर पड़ने की संभावना है।

संडारे ने कहा कि तटीय जिले चक्रवात से प्रभावित हो सकते हैं। गजपति और गंजम जैसे जिलों में बाढ़ का असर दिख सकता है। इसके अलावा चिल्का लागून में तूफान आ सकता है।

चिल्का झील भुवनेश्वर से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और पुरी, खुर्दा और गंजम जिलों में फैला है।

संडारे ने बताया, "राज्य के तटीय जिलों के करीब 30,000 से 40,000 लोग प्रभावित हो सकते हैं। सभी को सतर्क कर दिया गया है। हम लोग स्थिति पर निगरानी कर रहे हैं, यदि जरूरी हुआ तो हम लोगों को वहां से निकालेंगे और उन्हें विभिन्न आश्रय स्थलों में भेजेंगे।"

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही सभी संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव कर्मियों की तैनाती कर दी है।

चक्रवाती तूफान लैला गुरुवार दोपहर गुंटूर जिले में बापाटला के निकट आंध्र प्रदेश के तट को पार कर गया।

संडारे ने कहा कि राज्य के उत्तरी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। साथ ही गुरुवार शाम से उड़ीसा के तट पर 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

उन्होंने कहा, "हमने मछुआरों को चेतावनी जारी की है कि वे समुद्र में न जाएं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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