बाजार आधारित कृषि अनुसंधान की जरूरत : कस्तूरीरंगन
डा. कस्तूरीरंगन ने कहा कि इस समय उत्पादन, संरक्षण और फसल कटने के बाद के प्रबंधन में जो प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं, कृषि अनुसंधान को भी उसी श्रृंखला की कड़ी माना जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि नवरचना परियोजना की सराहना की कि उसने कृषि अनुसंधान प्रणाली के लिए मंच उपलब्ध कराया। उन्होंने मशविरा दिया कि एक ऐसी परिचालन प्रणाली बनाई जानी चाहिए जिसे हमेशा उन्नत किया जाता रहे और जो देश में कृषि को बढ़ावा दे सके।
इसके पूर्व कृषि अनुसंधान एवं शक्षिा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. एस. अय्यप्पन ने खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने और पोषण सुरक्षा संबंधी राष्ट्र के सामने खड़ी चुनौतियों के बारे में आगाह किया। उन्होंने कहा कि निर्धनता, उत्पादकता और लाभकारिता हमारे लिए महत्वपूर्ण मामले हैं।
इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय कृषि नवरचना परियोजना ने किया है। परियोजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की प्रमुख परियोजना है और इसे विश्व बैंक से छह वर्षो (2006-12) के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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