लैला के कमजोर पड़ने से तटीय आंध्र में राहत (लीड-1)
शुक्रवार तड़के लैला मछलीपट्टनम के निकट केंद्रित था और अब वह उत्तर-पूर्वोत्तर की ओर बढ़ने के बाद दबाव क्षेत्र में आकर कमजोर पड़ गया है। भारतीय मौसम विभान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक चक्रवाती तूफान काकीनाडा से करीब 100 किलोमीटर पश्चिम में केंद्रित है।
आईएमडी के बुलेटिन में कहा गया है, " इसके कमजोर पड़ने और शुरूआत में पूर्वोत्तर दिशा में उड़ीसा की ओर बढ़ने की संभावना है।"
आंध्र प्रदेश के उत्तरी तट और तेलंगाना में अगले 24 घंटों के दौरान भारी से बेहद भारी वर्ष हो सकती है।
चक्रवात के कमजोर पड़ने से तटीय आंध्र के लोगों खासतौर पर दक्षिणी तटीय जिलों को राहत मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि बारिश और हवाओं की प्रचंडता में कमी आई है।
मुख्यमंत्री के. रोसैया ने अधिकारियों को अगले दो दिनों तक चौकस रहने की सलाह दी है।
इस बीच दक्षिणी तटीय जिलों प्रकाशम, गुंटूर, नेल्लोर और कृष्णा में राहत कार्य जोरों पर है। 70 हजार से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों में ले जाया गया है। इनमें से ज्यादातर प्रकाशम जिले के रहने वाले हैं।
गुंटूर जिले के बपाटला शहर में चक्रवात की चपेट में आकर 17 लोग मारे गए। इस बीच चक्रवात के कारण राज्य में मरने वालों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। विजयवाड़ा में शुक्रवार तड़के एक दीवार ढहने से दो बच्चों सहित एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई।
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कृष्णा जिले में सात मौते हुई हैं। नेल्लोर में चार, गुंटूर में तीन, पूर्वी गोदावरी में दो, प्रकाशम जिले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। तीन व्यक्ति लापता बताए गए हैं।
लैला अपने पीछे चार जिलों में तबाही का मंजर छोड़ गया है। मकान और फसलों को नुकसान पहुंचा है, परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है और बिजली तथा संचार सेवाएं बाधित हैं। तेज हवाओं की वजह से पेड़, बिजली के खंबे और संचार टॉवर उखड़ गए। 1047 गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इसके अलावा आम, केले और बागानों की अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है।
बारिश और तेज हवाओं की वजह से 85 मकान पूरी तरह और 187 आंशिक रूप से नष्ट हो गए हैं। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राहत शिविरों में एक लाख 70 हजार भोजन के पैकेटों और 6.34 लाख पानी के केन पहुंचाए गए हैं।
प्राथमिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 5800 एकड़ जमीन में लगी फसलों और 6060 एकड़ जमीन में लगे बागवानी को नुकसान पहुंचा है।
मछुवारों ने अपनी 262 नावें खो दी है। इनमें से 260 नावें केवल प्रकाशम जिले में लापता हुई हैं। तटीय सात जिलों में करीब 1450 नावों को नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन ने 10 हेलीकॉप्टर तैयार रखे हुए हैं जबकि सशस्त्र बलों ने तीन टुकड़ियों और चार हेलीकॉप्टरों को राहत कार्यो के लिए तैयार रखा है। वायु सेना के 11 विमान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
पेड़ उखड़ने की वजह से तटीय जिले में दूसरे दिन सड़क यातायात थम गया। 100 से ज्यादा रेलगाड़ियां रद्द कर दी गई हैं और बहुत सी अन्य रेलगाड़ियों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है। चेन्नई और विजयवाड़ा के बीच रेल गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।
उधर, चक्रवाती तूफान के असर से गुरुवार शाम से ही उड़ीसा में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हो रही थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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