क्या भ्रष्टाचार मिटा पाएंगे बाबा रामदेव?

अपने भक्तों और प्रशंसकों की संख्या को देखकर शायद उनका विश्वास कई गुना बढ़ जाता होगा। बाबा रामदेव का कहना है कि वे आज जो भी हैं अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर हैं, उन्हें यक़ीन है कि उनकी राजनीतिक पार्टी को लोग खुलकर वोट देंगे।
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सबसे बड़ी बात यह है कि अगर बाबा रामदेव जैसे राजनीति में आ भी गए तो क्या वो अपनी अपनी इस भूमिका के साथ न्याय कर पाएंगे। पिछला इतिहास उठाकर देखें तो फिल्म अभिनेता गोविंदा और धर्मेंद्र जैसे जैसे कई फिल्मी हस्तियां जो लोकसभा तक पहुंची, ने पिछली लोकसभा में पूरे पांच साल के कार्यकाल में सदन में एक भी सवाल पूछने की ज़हमत नहीं उठाई। यही नहीं वर्षों से राजनीति कर रहे नेताओं का भी यही हाल रहा।
बाबा रामदेव के समर्थकों की संख्या को देख उनका राजनीति में आना एक बड़ी क्रांति साबित हो सकता है, लिहाजा राजनीति के कई दिग्गज उनके आगे रोढ़े अटकाने की पूरी कोशिशें करेंगे। यदि ये दोनों राजनीति में आ भी गए तो यह बात पक्की है कि राजनीति के कीड़े उनका इस दलदल में जीना मुश्किल कर सकते हैं। ये वो कीड़े होंगे, जिनके लिए राजनीति सेवा नहीं व्यवसाय है। ऐसे लोग रामदेव जैसे स्वच्छ छवि वाले राजनेताओं को टिकने नहीं देंगे।
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रामदेव की राजनीतिक पारी के पर राजनीतिशास्त्र के विद्वान लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. एसके द्विवेदी ने कहा कि सवाल इस बात का है कि अगर बाबा रामदेव का राजनीति में आना तो अच्छे संकेत हैं, लेकिन नए दल बनाने की खास जरूरत नहीं है। देश में पहले ही राजनीतिक दलों की संख्या बहुत बड़ी है।
प्रो. द्विवेदी का कहना है कि अलग राजनीतिक दल का मतलब होता है एक अलग विचारधारा लेकर आगे बढ़ना। अगर बाबा रामदेव की विचारधारा मौजूदा दलों की विचारधारा से एकदम अलग है, तबतो उनका नई पार्टी बनाना एकदम सही है, लेकिन अगर वे भी पुरानी विचारधारा के साथ राजनीति में आना चाहते हैं, तो अच्छा होगा कि वे उस दल से जुड़ जाएं जिसकी विचारधारा के अनुकूल वे काम करना चाहते हैं।












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