शेखावत का निधन, देश भर में शोक की लहर (लीड-3)
पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे शेखावत के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति अंसारी ने अपने संदेश में कहा कि लंबे समय तक राष्ट्र सेवा में योगदान के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा के प्रति सपर्मण, सेवा भावना और सादगी के लिए शेखावत को हमेशा जनता का स्नेह और आदर मिला।
अंसारी ने कहा कि अपने शानदार राजनीतिक जीवन में शेखावत राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री बने और उन्हें देश का उपराष्ट्रपति व राज्यसभा का सभापति बनने का भी गौरव हासिल हुआ।
प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि शेखावत राजस्थान के सबसे कद्दावर नेताओं में से थे। उन्होंने कहा कि शेखावत हमेशा सिद्धांतों के साथ आगे बढ़े। प्रधानमंत्री ने कहा, "भैरोसिंह शेखावत का शुरुआती जीवन कठिन रहा। गरीबी की वजह से उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। बाद में उन्होंने पुलिस विभाग में नौकरी की।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "शेखावत जी एक करिश्माई नेता थे। उन्होंने कुछ अन्य नेताओं के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक युग को परिभाषित किया। उनमें कई गुण थे। उनका नजरिया उदार था। सामाजिक कार्यकर्ता और सार्वजनिक हस्ती के रूप में वह हमेशा अपने सिद्धांतों के साथ खड़े रहे।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भैरोसिंह शेखावत का ही साहस था कि उन्होंने 1982 के देवराला सती कांड का विरोध किया।
आडवाणी ने अपने शोक संदेश में कहा, "भैरोसिंह शेखावत जी के साथ मेरी यादें 1952 के पहले आम चुनाव से शुरू होती हैं। भैरोसिंह शेखावत जी ने हर बार अपनी क्षमता साबित की।"
भाजपा के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि शेखावत के निधन से देश ने एक उत्कृष्ट राजनेता, कुशल प्रशासक और लोकनेता को खो दिया है। उन्होंने कहा कि शेखावत के निधन से देश और भाजपा को भारी क्षति हुई है।
गडकरी ने कहा कि शेखावत भाजपा की पहली पीढ़ी के नेता थे और उन्होंने जनसंघ और फिर भाजपा को राष्ट्रीय पार्टी बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि शेखावत ने जनसंघ और भाजपा में सक्रिय भूमिका का निर्वाह किया और बाद में अपने महत्वपूर्ण कायरें की वजह से उपराष्ट्रपति के पद पर नियुक्त हुए। गडकरी ने कहा कि शेखावत अपने जुझारूपन और कर्मठता के कारण तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और पार्टी को उनकी प्रशासनिक कार्यक्षमता पर हमेशा गर्व रहा।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी शेखावत के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि शेखावत एक बड़े नेता थे। खुर्शीद ने कहा, "हम उनके निधन पर शोक जताते हैं और उनके परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शेखावत के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि वह निष्पक्ष, निष्ठावान और स्वाभिमानी थे। उनकी मौत से देश ने एक राष्ट्रभक्त और मिलनसार व्यक्ति खो दिया। लालू ने कहा कि शेखावत किसी पार्टी के नहीं बल्कि पूरे देश के नेता थे।
बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शेखावत के निधन पर गहरा दुख प्रकट करते हुए इसे राजनीतिक बिरादरी के लिए बड़ी क्षति बताया।
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने कहा कि राजनीति में आने वाली पीढ़ी के लोगों को शेखावत के आदर्श से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका वात्सल्य प्रेम अतुलनीय था और वह पार्टी हित को नहीं बल्कि देश के हित को प्राथमिकता देते थे।
शेखावत को बेचैनी और सांस लेने में तकलीफ की वजह से गुरुवार को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उन्हें शनिवार तड़के जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था।
सवाई मानसिंह अस्पताल सूत्रों के अनुसार शेखावत को सुबह 11.10 बजे मृत घोषित किया गया था। उनके परिवार में पत्नी सूरज कंवर और एक बेटी हैं। उनकी पत्नी और दामाद नरपत सिंह राजवी अस्पताल में उपस्थित थे।
शेखावत का जन्म 23 अक्टबूर, 1923 को राजस्थान के सीकर जिले के खचरियावास गांव में हुआ था। वह तीन बार वर्ष 1977-1980, 1990-1992 और 1993-1998 में राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे।
शेखावत ने हाई स्कूल तक की पढ़ाई की थी। पिता की मौत के बाद वह आगे नहीं पढ़ सके। उन्होंने कृषक का काम किया और फिर पुलिस में भर्ती हुए। उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में वर्ष 1952 में कदम रखा था।
उप राष्ट्रपति कृष्णकांत के निधन के बाद शेखावत उप राष्ट्रपति चुने गए थे। वह अगस्त 2002 से जुलाई 2007 तक उप राष्ट्रपति पद पर रहे। वर्ष 2007 में वह राष्ट्रपति चुनाव में पराजित हो गए।
शेखावत राजस्थान में काफी लोकप्रिय थे। उन्हें 'राजस्थान का एक ही सिंह' कहा जाता था। वह पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications