ओबामा ने पाकिस्तान को आगाह किया (लीड-1)

वाशिंगटन, 13 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पाकिस्तान को आगाह करते हुए कहा है उसके कयाबली इलाकों में आतंकवादियों को 'सुरक्षित पनाहगाह' बनाने या ओसामा बिन लादेन को आतंकवादी गतिविधियां संचालित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। साथ ही उनका मानना है कि लंबे अरसे से भारत को सबसे बड़ी चिंता के रूप में देखते रहने के बाद पाकिस्तान को अब इस बात का एहसास होने लगा है कि आतंकवाद उसकी संप्रभुता के लिए कैंसर बनता जा रहा है।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के साथ साझा प्रेस वार्ता में बुधवार को ओबामा ने कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम अलकायदा को गतिविधियां संचालित करने की इजाजत नहीं देंगे। हम उस इलाके (कबायली इलाके) में आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह नहीं बनाने देंगे।"

उन्होंने कहा, "मैं अलकायदा या ओसामा बिन लादेन को निर्भयता के साथ गतिविधियां संचालित करने की इजाजत नहीं दे सकता। ये लोग अमेरिका पर हमले की साजिश रच रहे हैं।"

ओबामा ने कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विशेष दूत के तौर पर रिचर्ड हॉलब्रुक की नियुक्ति आतंकवाद से निपटने की दिशा में आयाम ढूंढ़ने के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से सेना हटाने की कोई निश्चित अवधि तय नहीं की गई है।

ओबामा ने कहा कि लंबे अरसे से भारत को सबसे बड़ी चिंता के रूप में देखते रहने के बाद पाकिस्तान को अब इस आतंकवाद से खतरों का अहसास होने लगा है। उसे लगता है कि आतंकवाद उसकी संप्रभुता के लिए कैंसर बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह समझते हैं कि पूर्व में पाकिस्तान की एकमात्र चिंता भारत को लेकर थी।"

उन्होंने कहा, "पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में यह स्वीकार्यता बढ़ने लगी है कि उनके बीच कैंसर पनप रहा है। उसने जिन आतंकवादी संगठनों को एकजुट होने और उन्हें सीमांत क्षेत्रों को अपना आधार बनाने देने तथा फिर अफगानिस्तान जाने देने की अनुमति दी, वहीं आज पाकिस्तान की संप्रभुता के लिए खतरा बन गए हैं।"

उन्होंने कहा कि वह और करजई पूर्व में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, उनके खुफिया अधिकारियों और उनकी सेना से मिल चुके हैं और बता चुके हैं कि उनकी सुरक्षा को भीतर से ही सर्वाधिक खतरा है।

ओबामा ने कहा, "हमारा उद्देश्य कुछ पुराने संदेहों और पुरानी गलत आदतों को खत्म करना है और पाकिस्तान को यह जताना कि स्थिर अफगानिस्तान में ही उसका हित है। पाक के साथ मिलकर हम काम करते रहना चाहते है।"

उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खात्मे के लिए मिलकर काम करना होगा। वास्तव में पाकिस्तान सरकार द्वारा पिछले कुछ महीनों में उठाए गए आतंकवाद विरोधी कदमों से मैं उत्साहित हूं।"

पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, "सब कुछ रातों रात ठीक नहीं हो सकता। यह सतत प्रक्रिया है जो जारी रहेगी।"

ओबामा ने संकेत दिया कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई शांति बहाली करने की कोशिशों के तहत यदि तालिबान नेताओं से बातचीत करते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

अमेरिका के दौरे पर आए करजई से 45 मिनट की मुलाकात के बाद ओबामा ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "अमेरिका और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में तनाव संबंधी खबरों में से अधिकांश को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया गया।"

दोनों नेताओं ने कहा कि तनाव बढ़ना तय था और अफगान सरकार में भ्रष्टाचार तथा अमेरिकी नेतृत्व वाली सेना के हमलों में नागरिकों की मौतों जैसी आपसी समस्याओं से निपटा जाना अभी शेष है।

करजई पिछले दो दिनों से रणनीतिक वार्ता के लिए अमेरिका में हैं। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स और वरिष्ठ सैनिक अधिकारियों से मुलाकात की।

अपनी टिप्पणी में करजई ने कहा कि आतंकवादियों को पराजित करने, सरकार से भ्रष्टाचार खत्म करने और जुलाई 2011 से अमेरिकी सेनाओं की वापसी शुरू कर सकने के लिए एक मजबूत सेना के गठन के व्हाइट हाउस के लक्ष्यों को पूरा करने में सहयोग देने के लिए वह प्रतिबद्ध हैं।

करजई ने कहा, "हम एक साथ आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इसमें हम कभी खुश होते हैं तो कभी नहीं भी खुश होते हैं। एक समान उद्देश्य के लिए यह पारस्परिक संबंध है।"

ओबामा ने संकेत दिया कि करजई की कुछ तालिबान नेताओं से शांति वार्ता की योजना पर उनको आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि कबायली बुजुर्गो की सभा जिरगा भविष्य में वार्ता के लिए आधार उपलब्ध कराएगी।

ओबामा ने कहा, "हम लंबे समय से अफगान संविधान,कानून का शासन, मानव अधिकारों का सम्मान करने की बात कहते रहे हैं, इसलिए अगर वे हिंसा और अलकायदा के साथ अपने संबंधों को छोड़ने के इच्छुक हैं तो करजई को अफगान समाज के उन तत्वों या व्यक्तियों से बात करने के लिए सक्षम होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि इन वार्ताओं से अधिकतम लाभ के लिए गठबंधन को तालिबान के खिलाफ अधिक सफल होने की जरूरत है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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