अवकाश प्राप्त न्यायाधीश करेंगे जामिया में अनियमितताओं की जांच
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मुशीरुल हसन के कार्यकाल के दौरान नियुक्तियों और पदोन्नतियों में हुई अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी।
विश्वविद्यालय के सूत्रों ने आईएएनएस को बताया, "विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद द्वारा यह फैसला 29 अप्रैल को होने वाली बैठक में लिया गया।"
पूर्व कुलपति हसन के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2005 से लेकर 2009 के बीच कम से कम 50 नियुक्तियों और अन्य स्थानों पर कथित अनियमितताओं लेकर सरकार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इसकी शिकायत की थी।
कार्यकारी परिषद के मुताबिक इस मामले की स्वंत्र जांच अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से कराई जा सकती है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति नजीब जंग ने नौ महीने पहले ही जामिया मिलिया इस्लामिया के 13वें कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था।
उल्लेखनीय है कि 91 साल पुराने इस विश्वविद्यालय को ब्रिटिश शासन के खिलाफ चलाए गए असहयोग आंदोलन के समय राष्ट्र के मुस्लिम नेताओं द्वारा स्थापित किया गया था। वर्तमान में इस विश्वविद्यालय में 18,000 छात्र अध्ययनरत हैं जबकि 800 कर्मचारी यहां मौजूद हैं। विश्वविद्यालय में चल रहे नौ संकायों में लगभग 200 पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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