निठारी हत्याकांड : कोली बलात्कार व हत्या का दोषी (राउंडअप)

सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश ए.के.सिंह ने आरती के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में कोली को दोषी करार दिया। निठारी कांड का यह दूसरा मामला है जिसमें कोली को दोषी करार दिया गया है।

निठारी गांव के 19 बच्चों और महिलाओं की हत्या कर दी गई थी। उनके शरीर के कई अंग बाद में मोनिंदर के घर के पीछे एक नाले में पाए गए। सीबीआई ने अपहरण, बलात्कार और हत्या के 19 मामलों में से 17 में आरोप-पत्र दायर कर दिया है। सभी मामलों की सुनवाई अलग-अलग हो रही है।

38 वर्षीय कोली को बलात्कार, अपहरण और हत्या के सभी मामलों में आरोपी बनाया गया है जबकि उसके मालिक 55 वर्षीय पंढेर को केवल छह मामले में छह आरोपी बनाया गया है।

अदालत के फैसले के बाद कोली ने आईएएनएस से कहा, "गरीब होने के कारण मेरे साथ अन्याय हुआ है। एक नौकर को दोषी ठहराया गया है और एक प्रभावी व्यक्ति को रिहा कर दिया गया। पंढेर के बेटे करन सिंह पंढेर द्वारा धमकी दिए जाने के कारण भी मैं विरोध नहीं कर सका। मुझे धमकी दी गई थी कि यदि मैं अदालत में सीबीआई के कथन का समर्थन नहीं करता हूं तो मेरे बेटे को अगवा कर लिया जाएगा।"

आरती की हत्या मामले में केवल कोली पर आरोप लगा था। अदालत के फैसले के तुरंत बाद आरती के पिता दुर्गा प्रसाद ने फैसले की समीक्षा के लिए विशेष अदालत के समक्ष आवेदन दायर किया।

प्रसाद ने कहा कि इस मामले में पंढेर के खिलाफ भी आरोप-पत्र दाखिल किया जाना चाहिए।

प्रसाद ने कहा, "इस मामले में अदालती कार्रवाई से हम खुश नहीं है। हम इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करेंगे ताकि पंढेर के खिलाफ आरोप तय हो।"

अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ प्रसाद ने कहा कि पंढेर को छोड़ देना न्यायिक प्रक्रिया का एक मजाक है। परिवार के अन्य सदस्यों ने कहा कि गरीब होने के कारण उनको न्याय नहीं मिल सकता।

न्यायालय के आदेश का ब्योरा देते हुए सीबीआई के वकील सुनील बत्रा ने कहा कि अभियोजन और सीबीआई द्वारा पेश सभी साक्ष्यों को न्यायालय ने सही ठहराया।

आरती मामले में सीबीआई ने कहा था कि 25 सितंबर 2006 को आरती चॉकलेट के लिए अपने दादा के घर गई थी लेकिन वह नहीं लौटी। इसके बाद प्रसाद ने नोएडा पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी।

पुलिस ने इस मामले में 29 दिसंबर 2006 को आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में सीबीआई को यह मामला सौंपा गया।

निठारी हत्याकांड के पहले मामले में एक वर्ष पहले फैसला आया था। गाजियाबाद की एक निचली अदालत ने रिम्पा हलदर मामले में कोली और पंढेर को मौत की सजा सुनाई थी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोली की सजा बरकरार रखी लेकिन पंढेर को आरोप मुक्त कर दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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