अदालत ने महिला से कहा, पहले बच्चों का विश्वास जीतो
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। सौतेले बेटे की हत्या के आरोप से अदालत द्वारा बरी हुई महिला से सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अपने तलाकशुदा पति से अपने खुद के बच्चों को हासिल करने के पहले वह उनका विश्वास जीते। क्योंकि दोनों बेटों ने अपनी मां के खिलाफ गवाही दी है।
न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर की एक पीठ ने अपने आदेश में कहा, "बेहतर प्रक्रिया यह होगी कि मां को पहले इस बात का मौका दिया जाए कि वह अपने खुद के बच्चों के साथ रिश्ता विकसित करे और धीरे-धीरे खुद को उनकी मां के रूप में स्थापित करे।"
माया नामक यह महिला गौरव (11), और सौरव (9) नामक अपने दोनों बेटों को हासिल करना चाहती है। दोनों बच्चे अपने पिता के साथ महाराष्ट्र में रहते हैं। लेकिन अदालत ने महिला की याचिका फिलहाल खारिज कर दी है।
अदालत ने यह फैसला उन दोनों बच्चों से मिलने के बाद दिया है। अदालत ने यह पता किया कि क्या दोनों बच्चे अपनी मां के साथ रहना चाहते हैं। खंडपीठ ने पाया कि दोनों बच्चे प्रकाश के साथ रहना चाहते हैं। यह अपने आप में आश्चर्यजनक है कि बड़ा बेटा अपनी मां का नाम तक नहीं जानता।
माया की याचिका को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने अगले छह महीनों तक के लिए उसे अपने बेटों से सीमित संपर्क की व्यवस्था बहाल कर दी है। वह एक शनिवार के अंतराल पर दूसरे शनिवार को और साल में लंबी छुट्टियों के दौरान उनसे मिल सकती है। छह महीने बाद अदालत इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेगा कि बच्चों को महिला के अधिकार में देना है या नहीं।
बांबे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने माया की याचिका पर बच्चों को उसके अधिकार में दे दिया था। लेकिन इस फैसले को दरकिनार करते हुए अदालत ने कहा, "तथ्यों और स्थितियों के मद्देनजर हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं ्र कि यदि बच्चों को जबरन अपने पिता से अलग किया गया और उन्हें उनकी मां को सुपूर्द किया गया तो वे टूट जाएंगे और यह किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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