लाजपत नगर विस्फोट: घटनाक्रम का ब्योरा
21 मई, 1996- लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में विस्फोट, 13 लोगों की मौत।
26 अगस्त, 1996- पुलिस ने एक महिला सहित 10 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस ने 201 गवाहों की सूची पेश की।
20 नवंबर, 2000- अदालत ने आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, राष्ट्र विरोधी गतिविधियां और विस्फोट कानून के तहत आरोप तय किया। आरोपियों ने खुद को निर्दोष करार दिया।
एक सितंबर, 2009- जिला न्यायाधीश ने मामले को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.पी.गर्ग को स्थानांतरित कर दिया।
सात सितंबर, 2009- गर्ग की अदालत में सुनवाई आरंभ।
30 मार्च, 2010- अदालत ने फैसला टाला।
आठ अप्रैल, 2010- अदालत ने छह आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि चार को बरी कर दिया।
13 अप्रैल, 2010- अदालत ने सजा की अवधि पर सुनवाई की।
22 अप्रैल, 2010- अदालत ने मिर्जा निसार हुसैन ऊर्फ नाजा, मोहम्मद नौशाद और मोहम्मद अली भट्ट ऊर्फ किल्ले को मृत्युदंड की सजा सुनाई, जबकि जावेद अहमद खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 35,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने विस्फोट मामले में दोषी एकमात्र महिला फरीदा डार को चार साल व दो माह कैद की सजा सुनाई। उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसके अलावा फारुक अहमद खान को सात वर्ष की कैद की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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