कमीशन दरों में कटौती से निजी बीमा कंपनियां चिंतित

गैर जीवन बीमा कंपनियां अपने कुल पुनर्बीमा व्यापार का 10 प्रतिशत हिस्सा जीआईसी को देने को बाध्य हैं, इसे अनिवार्य समर्पण (आब्लिगेटरी सेशन) कहा जाता है।

इस मार्च में बीमा नियामक ने जीआईसी को गैर जीवन बीमा कंपनियों से अनिवार्य समर्पण बीमा पर कमीशन दरों पर सौदेबाजी की अनुमति दे दी। इसके बाद पिछले तीन वर्षो के दावों का अध्ययन करके जीआईसी ने अब नई दरों का प्रस्ताव दिया है।

कुछ बीमाओं की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है लेकिन कुछ की दरों को घटाकर आधा कर दिया गया है।

उद्योग के एक अधिकारी ने नाम का उल्लेख नहीं करने की शर्त पर बताया, "स्वास्थ्य बीमा हासिल करने के लिए एक ओर जहां हम 17.5 प्रतिशत भुगतान करते हैं वहीं हमें केवल 12.5 प्रतिशत मिलता है। आग बीमा के मामले में 30 प्रतिशत के स्थान पर 15 प्रतिशत का प्रस्ताव है। नई दरों से कई बीमा कंपनियों का मुनाफा प्रभावित होगा।"

परिषद के महासचिव एस.एल.मोहन ने आईएएनएस से कहा, "हम मामले से परिचित हैं लेकिन बीमा कंपनियों ने जीआईसी के खिलाफ मामले को नहीं उठाया है।"

उधर जीआईसी के कदम को सही ठहराते हुए मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं कंपनी के एक अधिकारी ने मुंबई से आईएएनएस से कहा कि पुराने विनियमों के समाप्त होने के बाद प्रीमियम की दरें कम हुईं जबकि जीआईसी ने बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) द्वारा निर्धारित दरों का भुगतान किया। जीआईसी की याचिका पर इरडा ने निजी कंपनियों से कमीशन पर सौदेबाजी की अनुमति दे दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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