तिलचट्टे के जीवाश्म का थ्री-डी प्रारूप
लंदन, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। करीब 30 करोड़ साल पहले पाए जाने वाले तिलचट्टे के जीवाश्म को थ्री-डी प्रारूप में बदला गया है। इस माध्यम से इसके बारे में विस्तार से जाना जा सकता है।
इंपीरियल कॉलेज लंदन (आईसीएल) के वैज्ञानिकों ने अर्कीमिलैकरिस एग्गिनटोनी नामक जीवाश्म के थ्री-डी प्रारूप को विकसित किया है। एग्गिनटोनी आधुनिक तिलचट्टे और दीमक का एक प्राचीन पूर्वज है। करीब 35.9 से 29.9 करोड़ साल पहली के कार्बनिफरस पीरियड (इस दौर में ग्लेशियर और पहाड़ बने) के दौरान यह कीट पृथ्वी पर पाया जाता था। यह वही दौर था जब कुछ ही समय पहले जीवन का उद्भव समुद्र से पृथ्वी की ओर हुआ था।
इस जीव का जीवाश्म आमतौर पर दो से नौ सेंटीमीटर लंबा और करीब चार सेंटीमीटर चौड़ा होता है।
आईसीएल में एक शोध छात्र रस्सेल गारवुड कहते हैं, "कार्बनिफरस पीरियड को कई बार तिलचट्टों के युग के रूप में जाना जाता है क्योंकि अर्कीमिलैकरिस एग्गिनटोनी के जीवाश्म और इसके नजदीकी इस समयावधि के ज्यादातर आम कीड़ों में शामिल हैं। साथ ही ये पूरी दुनिया में पाए जाते हैं।"
गारवुड ने कहा, "लोग मजाक में कहते हैं कि तिलचट्टों को मार पाना असंभव है और हमारे थ्री-डी प्रारूप ने इन्हें एक और जीवन दे दिया।
शोधकर्ताओं ने सीटी स्कैन यंत्र से इनके चित्रों की रचना की। इससे जीवाश्म के 3142 एक्स-रे चित्र लिए गए और फिर इन्हें एक थ्री-डी प्रारूप में संयोजित किया गया।
शोधकर्ताओं ने इस प्रारूप में अर्कीमिलैकरिस एग्गिनटोनी के पैरों, एंटीना, मुंह के हिस्से और शरीर को चित्रित किया गया है जिसे इससे पहले आदमी नहीं देख सका था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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