'सेबी के प्रतिबंध को न मानें बीमा कंपनियां'
इरडा ने कहा है कि इस प्रतिबंध से जीवन बीमा क्षेत्र ठप हो जाएगा। इरडा ने शनिवार की रात सेबी के आदेश में शामिल 14 बीमा कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे बीमा कानून 1938 द्वारा जारी नियमों, कानूनों और दिशानिर्देशों के अनुसार सहज रूप में अपने बीमा कारोबार जारी रखें।
इस बीच एगॉन रेलिगेयर, अविवा, बजाज अलियांज, भारती एएक्सए, बिरला सन, एचडीएफसी स्टैंडर्ड, आईसीआईसीआई प्रूडेंसियल, आईएनजी वश्य, कोटक महिंद्रा, मैक्स न्यूयार्क, मेटलाइफ इंडिया, रिलायंस लाइफ इनश्योरेंस, एसबीआई लाइफ इनश्योरेंस और टाटा एआईजी ने सोमवार को सेबी के प्रतिबंध आदेश पर स्थगित किए जाने के लिए सोमवार को अदालत का दरवाजा खटखटाने की योजना तैयार की है।
इरडा की ओर से शनिवार की रात यहां जारी एक बयान में कहा गया था, "विभिन्न बीमा कंपनियों द्वारा प्रस्तावित, यूनिट लिंक्ड बीमा उत्पादों के पॉलिसी धारकों को विश्वास दिलाया जाता है कि ये पॉलिसियां सुरक्षित हैं और सेबी के हाल के आदेश से पैदा हुए इस मामले से कानून के दायरे में किसी उचित फोरम में शीघ्र ही निपट लिया जाएगा।"
इरडा के अनुसार वर्ष 2008-09 में 7.03 करोड़ यूलिप के एवज में कुल 90,645 करोड़ रुपये का प्रीमियम अस्तित्व में था।
सेबी ने अपनी वेबसाइट पर शुक्रवार की रात जारी किए आदेश में कहा है, "इन कंपनियों की ओर से लांच किए गए यूलिप को प्रथम दृष्टया पाया गया है कि ये म्यूचुअल फंड योजनाओं जैसे ही हैं और इन्हें सेबी से पंजीकरण कराए बगैर ही लांच किया गया है।"
यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। सेबी ने इन सभी कंपनियों को जनवरी महीने में ही कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य प्रशांत सरन ने आदेश में कहा है, "मैंने पाया है कि कंपनियों ने अपनी खुद की स्वीकारोक्ति में कहा है कि यूलिप के दो घटक हैं। पहला इनश्योरेंस घटक, जहां जीवन बीमा का हिस्सा बीमा कंपनी के पास होता है और दूसरा निवेश घटक, जहां जोखिम निवेशक के साथ होता है।"
सरन ने कहा है, "इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि यूलिप एक मिश्रित उत्पाद हैं और निवेश घटक के पंजीकरण और सेबी द्वारा नियंत्रित होने की आवश्यकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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