नलिनी की रिहाई की याचिका खारिज
तमिलनाडु सरकार की ओर से सौंपे गए हलफनामे से सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति एलिपे धर्मा राव और न्यायमूर्ति के.के.शशिधरन की खण्डपीठ ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर और जांच किए गए इस मामले में राज्य सरकार, केंद्र सरकार से मशविरा किए बगैर समय पूर्व रिहाई का निर्णय नहीं ले सकती।
नलिनी को एक बार पहले ही सजा में मिल चुकी छूट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे अन्य अभियुक्तों से नलिनी की तुलना नहीं की जा सकती।
ज्ञात हो कि पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी के हस्तक्षेप पर नलिनी की फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदल दी गई थी।
अदालत ने कहा कि नलिनी जेल से रिहाई की अपील भर कर सकती है, वह एक अधिकार के रूप में रिहाई की मांग नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि उसने जिस तरह से अपराध को अंजाम दिया था, उसका यही तकाजा है।
इसके पहले तमिलनाडु सरकार के महाधिवक्ता पी.एस.रामन ने 29 मार्च को नलिनी की मांग को खारिज करने संबंधी सरकार के निर्णय को अदालत में सौंपा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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