महिला आरक्षण पर सहमति नहीं

महिला आरक्षण विधेयक पर सहमति की सरकार की कोशिशों को झटका लगा है. सोमवार को नई दिल्ली में इस मुद्दे पर हुए सर्वदलीय बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला.
मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और शरद यादव अपनी पुरानी मांग पर अड़े रहे, जबकि केंद्र में कांग्रेस की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने भी उनके सुर में सुर मिलाया.
दो घंटे तक चले विचार-विमर्श के बाद यह फ़ैसला हुआ कि इस मुद्दे पर अभी और विचार की आवश्यकता है. इससे अब ये भी अटकलें लगाई जाने लगी हैं क्या इस बजट सत्र में ये विधेयक लोकसभा में पेश होगा या नहीं.
छुट्टियों के बाद 15 अप्रैल से बजट सत्र फिर शुरू हो रहा है. तमाम विरोध के बावजूद कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार राज्यसभा से यह विधेयक पारित करा चुकी है.
सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने की.
इस बैठक में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड) जैसे विधेयक के विरोधी और भारतीय जनता पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तेलुगूदेशम जैसी विधेयक की समर्थक पार्टियों ने भी हिस्सा लिया.
सरकार की ओर से इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल, गृह मंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री एके एंटनी और क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली मौजूद थे.
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री की ओर से एक संक्षिप्त बयान जारी हुआ है, जिसमें कहा गया है- विचार-विमर्श जारी रहेगा.
बैठक के बाद बाहर निकले राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पत्रकारों से कहा, "महिलाओं के लिए किसी भी आरक्षण में मुसलमान, पिछड़ी और दलित महिलाओं को शामिल करना चाहिए."
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले पर अपने रुख़ से पीछे हटने का सवाल ही नहीं है.
बैठक में केंद्र सरकार में मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने समाजवादी पार्टी, राजद और जनता दल (यू) नेताओं के सुर में सुर मिलाया और कहा कि मुसलमानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.
मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी महिला आरक्षण विधेयक में आरक्षण के प्रावधान की मांग की.
इस मुद्दे पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता बासुदेव आचार्य ने कहा कि आरक्षण के अंदर आरक्षण की मांग पर सरकार को ऐसा प्रस्ताव लाना चाहिए, जिसमें बताया जाए कि ऐसा कैसे हो सकता है.
उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक़ चुनाव में अन्य पिछड़े वर्गों या मुसलमानों के लिए आरक्षण की बात नहीं है.
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसके विरोध में नहीं है और अगर इस संबंध में कोई प्रस्ताव आता है, तो उनकी पार्टी इस पर विचार के लिए तैयार है.
हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस विधेयक को इसके मौजूदा स्वरूप में पारित कराने के पक्ष में है क्योंकि इसी रूप में यह राज्यसभा में पारित हो चुका है.
लोकसभा में विपक्ष की नेता और भाजपा की सांसद सुषमा स्वराज ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक पर सर्वसम्मति चाहती है और आरक्षण के अंदर आरक्षण की विरोधी है.












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