'कश्मीर की आजादी' छोड़ सभी मुद्दों पर वार्ता संभव : पिल्लै
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत सरकार अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से कश्मीर के मसले पर पर्दे के पीछे बातचीत जारी रखे हुए है और आजादी के अलावा किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
यह बात केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लै ने अपने कार्यालय नार्थ ब्लॉक में आईएएनएस के साथ बातचीत में कही।
पिल्लै ने कहा, "बातचीत जारी है और बातचीत जारी रहेगी।" उन्होंने कहा कि यह बातचीत पर्दे के पीछे जारी है। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार अभी तक पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की ओर से वर्ष 1995 में किए गए 'असीम संभावनाओं' वाले वायदे पर कायम है, पिल्लै ने कहा, "आपको आज के दौर की वास्तविकताएं समझनी होंगी।"
उन्होंने कहा, "हम हर किसी से कह रहे हैं कि कृपया हमें बताइए, आपको जो चाहिए, हासिल किया जा सकता है। हमारा रुख अपरिवर्तनीय नहीं है, भारत सरकार खुले दिल से उनकी बात सुनना चाहती है। पूर्ण आजादी-के लिए कोई भी सरकार हामी नहीं भरने वाली। आजादी के अलावा किसी भी मुद्दे पर हम बातचीत करने को तैयार हैं।"
क्या इसका आशय आतंकवाद झेल रहे राज्य के लिए स्वायत्तता से है, जहां 1989 से अलगाववादी संघर्ष में 70,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं?
इस पर उन्होंने कहा, "यह कुछ भी हो सकता है। राज्य में कुछ हद तक स्वायत्तता है। यदि उन्हें कुछ और चाहिए तो वे अपने विचार रख सकते हैं। हम किसी भी मसले पर वार्ता को तैयार हैं।"
पिल्लै ने कहा कि वरिष्ठ हुर्रियत नेता फजल कुरैशी पर पिछले वर्ष दिसंबर में हुए आतंकवादी हमले के बाद सरकार और कुछ अलगाववादी नेताओं के बीच वार्ता के बारे में चुप्पी साधनी पड़ी।
उन्होंने कहा, "आप जानते हैं कि कुरैशी के साथ क्या हुआ। लोग चाहते थे कि जहां तक हो सके कश्मीर में हालात सामान्य होने तक बातचीत होती रहे।"
हुर्रियत के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारुख के गृह मंत्री पी. चिदंबरम "गोपनीय वार्ता, गोपनीय कूटनीति" में शामिल होने की इच्छा जताने के बाद श्रीनगर में कुरैशी पर हमला हुआ।
पिल्लै ने कहा कि मीरवाइज की अगुवाई में हुर्रियत नेता पाकिस्तान के साथ वार्ता कर रहे हैं और इसलिए ऐसी कोई वजह नहीं है कि वे भारत सरकार के साथ बातचीत न करें।
गृह सचिव ने कहा कि पाकिस्तान हुर्रियत नेताओं पर भारत सरकार से वार्ता बंद करने के लिए दबाव बना रहा है।
उन्होंने कहा, "लेकिन हुर्रियत उन्हें कहती आई है कि आप हमारे लोगों को निशाना क्यों बना रहे हैं। यह बातचीत के सिद्धांतों के विरुद्ध है। हुर्रियत का यह संदेश 'आप हमें भारत के साथ वार्ता की इजाजत क्यों नहीं दे रहे' पाकिस्तान तक पहुंच गया है।"
उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया को वैसे ज्यादा स्पष्ट तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। पिल्लै ने कहा, "अब वक्त आ गया है कि हम सीधे तौर वार्ता करें। हुर्रियत की ओर से अभी तक किसी ने खुालकर नहीं कहा है कि वे क्या चाहते हैं। भारत सरकार स्पष्ट बातचीत करना चाहती है। हम काफी बातचीत कर चुके हैं। जब तक आप स्पष्ट नहीं होंगे, अस्पष्टता से कुछ हासिल न होगा।"
पिल्लै ने कहा कि आम कश्मीर को आज यह अहसास हो चुका है कि 'पाकिस्तान नाकाम मुल्क है।' वे पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते। भावनाओं का गुबार शांत हो चुका है हालांकि ऐसे भी लोग हैं जो कश्मीर की आजादी चाहते हैं लेकिन अब हम वहां सुरक्षा बलों की संख्या घटाने की प्रक्रिया में हैं ताकि वहां के लोग भारत के अन्य हिस्सों के लोगों की तरह आजादी महसूस कर सकें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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