आलू किसानों को अंधकारमय भविष्य की आशंका

अपराजिता गुप्ता

कोलकाता, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के आलू किसान इस समय कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारी पैदावार से कीमतों के नीचे आने, शीत भंडारण गृहों की अपर्याप्त संख्या और निर्यात के प्रशीतित कंटेनरों की कमी के कारण कुछ किसान तो अपनी फसल को जलाने की तैयारी में हैं।

उत्तर प्रदेश के बाद आलू के सबसे बड़े उत्पादक राज्य में वर्ष 2009-10 में 95 लाख टन आलू पैदा हुआ है जो पिछले वर्ष की तुलना में 55 लाख टन अधिक है।

पश्चिम बंगाल प्रगतिशील व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल मंडल ने कहा कि भंडारण क्षमता में कमी के कारण हर वर्ष आलू की पैदावार का एक प्रतिशत हिस्सा खराब हो जाता है। इस वर्ष बंपर फसल के कारण 5 से 10 प्रतिशत तक आलू खराब हो सकता है।

राज्य के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता ने स्वीकार किया कि बंपर पैदावार के कारण किसानों को नुकसान हुआ है। कुछ किसानों के आत्महत्या करने की भी खबरें सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की कुछ हद तक रक्षा के लिए सहकारी विभाग और राज्य के आवश्यक वस्तु आपूर्ति निगम के माध्यम से 3.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आलू की खरीद की जाएगी और इसे शीतगृहों में रखा जाएगा। इस आलू को राशन की दुकानों पर बाजार कीमत से कम पर बेचा जाएगा।

मंत्री ने कहा कि इस बार पैदावार इतनी अधिक है कि इन उपायों से किसानों की समस्याओं को पूरी तरह हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों से 400 करोड़ रुपये का आलू खरीदा है।

एक स्थानीय समाचार पत्र ने हुगली और जलपाईगुड़ी के मालबाजार इलाके के बाद एक बड़े आलू उत्पादक जिले बर्दवान में किसान आत्महत्याओं की खबरें दी हैं।

राज्य विपणन बोर्ड के अध्यक्ष नरेन चटर्जी ने बहरहाल इस प्रकार की खबरों का खंडन किया और आईएएनएस से कहा, "हमें किसानों की आत्महत्याओं की कोई जानकारी नहीं है।"

उधर कुछ खबरों में कहा गया है कि बहुत कम कीमतों के विरोध में माल्दा जिले में किसानों के एक समूह ने आलू की फसल जला दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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