'मायावती-राज्यपाल में टकराव'

बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी और मुख्यमंत्री मायावती के बीच टकराव के आसार पैदा हो गए हैं। दरअसल माया सरकार प्रतिमाओं और अन्य विवादित स्मारकों की सुरक्षा के लिए एक अलग फ़ोर्स बनाना चाहती हैं।
प्रस्तावित कानून में इस फ़ोर्स को किसी को बिना कारण बताए गिरफ्तार करने के भी अधिकार दिए गए हैं। विपक्ष ने इस क़ानून की निंदा की थी और एक नई फ़ोर्स बनाने को गैर ज़रूरी बताया था। राजभवन सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि गवर्नर ने बिल को मंज़ूरी न देने का मन बना लिया है।
विवादित विधेयक
संविधान के अनुसार राज्यपाल विधान मंडल का अंग है और विधेयक को मंज़ूरी देने या न देने के प्रश्न पर वह कैबिनेट की सलाह से बाध्य नहीं है। राज्यपाल जब तक चाहें बिल को अपने पास रख सकते हैं। मुख्यमंत्री मायावती ने पिछले दिनों राज्यापल से मुलाक़ात की थी। समझा जाता है कि दोनों के बीच इस बिल पर भी चर्चा हुई होगी।
विधेयक पर गवर्नर का रुख़ जानने के बाद अब माया सरकार ने विशेष सुरक्षा बल के लिए एक अध्यादेश तैयार करके गवर्नर के पास भेजा है। मालूम हुआ है कि यह अध्यादेश बिलकुल वैसा ही जैसा कि विधान सभा से पारित हुआ है। सरकार के इस कदम का मतलब यह है कि मुख्यमंत्री मायावती विशेष सुरक्षा बल बनाने के मामले में अपना कदम वापस लेने के बजाय गवर्नर से कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने के मूड में हैं।












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