लालू को सर्वोच्च न्यायालय से मिली राहत (लीड-1)

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बिहार सरकार को निचली अदालत के फैसले को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती देने का अधिकार नहीं है, जिसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई हो।

लालू और राबड़ी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आय से ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ बिहार सरकार की अपील को सुनवाई के लिए मंजूर करने के पटना उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।

प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन, न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा और न्यायमूर्ति बी. एस. चौहान की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।

लालू राबड़ी के वकील राम जेठमलानी की दलील को स्वीकार करते हुए अदालत इस बात पर सहमत हुई कि आपराधिक दंड प्रक्रिया की धारा 378 (2) के तहत सीबीआई द्वारा जांच किए गए किसी मामले पर निचली अदालत के फैसले को राज्य सरकार चुनौती नहीं दे सकती।

अदालत ने कहा कि यह अधिकार या तो जांच एजेंसी को है या फिर केंद्र सरकार को।

सीबीआई ने लालू और राबड़ी देवी के खिलाफ चारा घोटाला मामले में 46 लाख रुपये की आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोप में मामला दायर किया था। इसी मामले में लालू को जुलाई 1997 और फिर अक्टूबर 1998 में न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उन्हें नवंबर 2000 में बेऊर जेल में भी एक दिन बिताना पड़ा था।

लालू और राबड़ी को दिसंबर 2006 में सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया था। बिहार सरकार ने 2007 में अदालत के इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की थी।

आय से अधिक संपत्ति मामले में सर्वोच्च न्यायालय से मिली राहत को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री लालू प्रसाद ने सच की जीत बताया है। इस मामले में उन्हें तथा उनकी पत्नी राबड़ी देवी को गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली।

उधर, पटना में पत्रकारों से चर्चा करते हुए लालू ने कहा, "अदालत के फैसले को मैं शिरोधार्य करता हूं। मुझे न्यायपालिका पर प्रारंभ से ही विश्वास रहा है। न्यायपालिका में न्याय मिलना निश्चित होता है। मैं इस फैसले से खुश हूं।"

उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनके ऊपर जो अन्य आरोप हैं, उनमें भी उन्हें राहत मिलेगी। उन्होंने कहा, "ये मामले न्यायालय में लंबित है। इनमें भी मुझे जरूर न्याय मिलेगा।"

सर्वोच्च न्यायालय से मिली राहत के बाद राजद के प्रदेश कार्यालय में मिठाइयां बांटी गईं और खुशियां मनाई गईं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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