यूएई में 17 भारतीयों को मृत्युदंड की सजा पर सरकार चकित (लीड-2)
दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इन भारतीयों से संपर्क की अनुमति मांगी है। महावाणिज्य दूतावास शारजाह की शरिया अदालत से फैसले की एक प्रति हासिल करने की कोशिश में है।
इन भारतीयों पर अवैध शराब के कारोबार को लेकर पैदा हुए विवाद में एक पाकिस्तानी नागरिक की हत्या करने और तीन पाकिस्तानी नागरिकों को घायल करने का आरोप था।
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने कहा, "हम उन्हें वाणिज्य दूत से सहायता उपलब्ध कराएंगे और इस बात का पता लगाने की भी कोशिश करेंगे कि उच्च अदालत में इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए हम उनकी और किस तरह से मदद कर सकते हैं।"
प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री व्यालार रवि ने कहा है, "हम चाहेंगे कि इन नागरिकों के लिए सब कुछ किया जाए और उन्हें एक अच्छा वकील और वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाए। निश्चित रूप से हम इन लोगों की मदद की कोशिश करेंगे।"
रवि ने कहा, "मृत्युदंड चकित करने वाला है। हमने उन्हें अधिकतम मदद मुहैया कराने का निर्णय लिया है।"
उल्लेखनीय है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में जनवरी 2009 में अवैध शराब के कारोबार को लेकर हुए विवाद के बाद एक पाकिस्तानी नागरिक की हत्या और तीन अन्य लोगों को घायल करने के मामले में शारजाह की एक अदालत ने रविवार को 17 भारतीयों को मौत की सजा सुनाई थी। यह घटना शारजाह के अल सजा इलाके में हुई थी।
समाचार पत्र 'खलीज टाइम्स' के अनुसार डीएनए परीक्षण जैसे सबूतों के बाद न्यायाधीश यूसुफ अल हमादी ने इन लोगों को सजा सुनाई थी। पुलिस का कहना है कि पाकिस्तानी नागरिक पर चाकू से कई वार किए गए थे और उसके मस्तिष्क में भी चोट लगी थी जिससे उसकी मौत हो गई थी।
इन सभी ने मृतक के तीनों साथियों को भी मारने की कोशिश की थी लेकिन वह बच निकले। सजा पाने वाले भारतीयों की उम्र 17 से 30 साल के बीच है। बच निकले तीनों पाकिस्तानी नागरिकों के अनुसार उन पर 50 लोगों ने चाकुओं से हमला किया था।
पुलिस ने हमले की अगुवाई करने वाले 17 लोगों को गिरफ्तार किया था। अन्य को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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