त्रिपुरा में 1,900 मिजो शरणार्थी हुए बेघर

उप-मंडल दण्डाधिकारी दिलीप चकमा ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "सोमवार की देर रात उत्तरी त्रिपुरा के हमशापारा में अस्थाई तौर पर रह रहे करीब 371 शरणार्थी परिवारों की बांस से बनी अस्थायी झोपड़ियों के आग की चपेट में आ जाने के बाद ये झोंपड़ियां जलकर नष्ट हो गईं। इसकी वजह से इन परिवारों के 1,855 पुरुष, औरतें और बच्चे एक बार फिर बेघर हो गए।"

आग के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है।

एक वन्य अधिकारी की हत्या होने के बाद मिजोरम की बहुसंख्य मिजो जाति और रियांग जाति के बीच जातीय हिंसा हो गई थी। इस हिंसा के बाद से रियांग जाति के लोग 1997 से उत्तरी त्रिपुरा में छह शिविरों में रह रहे थे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय त्रिपुरा सरकार के माध्यम से इन शरणार्थियों पर अब तक 1.64 अरब रुपये खर्च कर चुका है।

त्रिपुरा सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय मिजोरम सरकार से शरणार्थियों को वापस बुलाने के लिए कहते रहे हैं। यद्यपि सरकार ने अब तक उनकी वापसी की कोई पहल नहीं की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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