संसद में 'नोटों की माला' और बरेली हिंसा पर हंगामा (लीड-2)
मायावती को एक जनसभा में कथित तौर पर नोटों की माला पहनाए जाने के मुद्दे पर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही दिन में दो बार स्थगित करनी पड़ी। बाद में लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा की अगली कार्रवाई अब 12 अप्रैल को होगी। इस मुद्दे को लेकर सासंदों ने सदन के बाहर प्रदर्शन किया और मामले की जांच की मांग की।
कांग्रेस सांसद जगदंबिका पाल ने संवाददाताओं से कहा, "इस मामले में एक जांच की जानी चाहिए, जिससे इन रुपयों के स्रोत का पता चल सके।" भाजपा नेता योगी आदित्यनाथ ने कहा, "हम रुपयों का स्रोत जानना चाहते हैं। मायावती राज्य की मुख्यमंत्री हैं और ऐसे में जनता को उन रुपयों के स्रोत के बारे में जानने का अधिकार है।"
इस मसले पर सदन में प्रश्नकाल के बाद सपा, कांग्रेस और भाजपा के सदस्यों ने सवाल खड़े किए। सदन में सपा सदस्यों ने लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार की शांत रहने की अपील की परवाह न करते हुए नारेबाजी जारी रखी।
हंगामा थमता न देख मीरा कुमार ने कार्यवाही पहले एक बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले सदन में प्रश्नकाल सुचारू रूप से चला। कार्यवाही दोबारा आरंभ होने पर भी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इस वजह से कार्यवाही दोबारा दो बजे तक के लिए स्थगित हुई।
राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया। इसके अलावा बरेली हिंसा के मुद्दे पर भी उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को घेरने की कोशिश की गई। सपा, भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों ने बरेली की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की। बरेली के कुछ इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा के बाद दो मार्च से कर्फ्यू जारी है।
सपा सदस्य रामगोपाल यादव ने लखनऊ में सोमवार को आयोजित बसपा की रैली की आलोचना करते हुए कहा, "बरेली शहर जल रहा है लेकिन अधिकारी कहीं और व्यस्त हैं। प्रशासन सो रही है। लोगों के पास दूध, दवाई नहीं है।"
कांग्रेस सदस्य राशिद अलवी ने कहा कि उन्हें बरेली जाने नहीं दिया गया और गाजियाबाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने कहा, "यह संविधान के खिलाफ है। मैं गाजियाबाद में था लेकिन आदेश बरेली के जिलाधिकारी ने दिया। आखिर उत्तर प्रदेश सरकार किस प्रकार काम करना चाहती है।"
कथित तौर पर नोटों की माला पहनाए जाने के मुद्दे पर अलवी ने कहा कि यह एक शर्मनाक घटना है। भाजपा सदस्य एस.एस.अहलूवालिया ने कहा कि बरेली में दंगे की वजह से सिख समुदाय के लोगों को काफी नुकसान हुआ है।
इस संबंध में बसपा सदस्य ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है और बरेली की स्थिति पर सदस्यों द्वारा की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से बाहर किया जाना चाहिए।
पाठक की इस मांग को उपसभापति के.रहमान ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सभापति की अनुमति के बाद इस मामले को उठाया गया।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को लखनऊ में हुई बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की जनसभा में मायावती को एक माला पहनाई गया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि इसमें हजार-हजार रुपये के नोट गूंथे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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