महिला आरक्षण विधेयक आम सहमति के बैगर नहीं : मोइली(साक्षात्कार)
मोइली ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, "लोकतंत्र में आप सभी विरोधों को दबा नहीं सकते। यही लोकतंत्र की वास्तविक खूबसूरती है।"
मोइली ने कहा कि विधेयक का विरोध कर रही पार्टियों ने सदन से बाहर इस पर चर्चा करने की मांग की है और संकेत दिया कि लंबित विधायी कार्यो के कारण सरकार भी इस पर नरम है।
उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा बजट सत्र में ही विधेयक को लाने का था लेकिन वह आसानी से इसे पारित कराना चाहती है।
मोइली ने संकेत दिया कि पार्टियों से चर्चा की तिथि केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी तय करेंगे।
विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण चक्रीय आधार पर 15 वर्षो के लिए उपलब्ध कराने संबंधी विधेयक का समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (युनाइटेड) का हिस्सा कड़ा विरोध कर रहा है।
विधेयक के विरोधी मुस्लिम, पिछड़े और दलित वर्गो की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की मांग कर रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी ने महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग की है।
मोइली ने आरक्षण के भीतर आरक्षण की संभावना से इंकार करते हुए कहा, "हम आरक्षण के भीतर आरक्षण कैसे दे सकते हैं। वर्तमान व्यवस्था में पिछड़ों और मुस्लिमों के लिए कोई आरक्षण नहीं है। यह कानूनी नहीं है।"
यह पूछे जाने पर कि महिला आरक्षण विधेयक से सरकार की स्थिरता को कोई खतरा है, मोइली ने कहा, "समाज में किसी भी बदलाव के लिए साहस, एक लक्ष्य के लिए प्रतिबद्धता होनी चाहिए, वही तो कसौटी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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