समान पेंशन के लिए सेवानिवृत्त सैनिकों का प्रदर्शन (लीड-1)

इन लोगों ने हालांकि अपने पदक नहीं लौटाए। ये लोग अपने पदकों को तीनों सेनाओं की प्रमुख राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को सौंपना चाहते थे।

एक्स-सर्विसमैन मूवमेंट (आईईएम) के लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राज कादियान ने कहा, "ये पदक हमारे लिए बेहद मूल्यवान हैं और हम इन्हें किसी को नहीं दे सकते। राष्ट्रपति ने इन्हें स्वीकार नहीं किया इसलिए हम इन्हें वापस ले रहे हैं। हमने 6,000 से ज्यादा सेवानिवृत्त रक्षाकर्मियों के खून से हस्ताक्षर किया हुआ ज्ञापन सौंपा है।"

इन लोगों की मांग है कि कोई भी सैनिक चाहे किसी भी तारीख में सेवानिवृत्त हुआ हो उसकी पेंशन समान होनी चाहिए।

अभी 1996 से पहले सेवानिवृत्त हुए सैनिकों को हर महीने 3,670 रुपये, वर्ष 1996 से दिसंबर 2005 के बीच सेवानिवृत्त हुए सैनिकों को 4,680 रुपये और जनवरी 2006 के बाद सेवानिवृत्त हुए सैनिकों को 8,700 रुपये की पेंशन मिलती है।

कदियान के अनुसार, केंद्र सरकार के आठ मार्च 2010 के निर्णय के हिसाब से पेंशन में अंतर को कम किया जाएगा लेकिन हमारी मांग है कि इस अंतर को पूरी तरह खत्म किया जाए।

इससे पहले जंतर-मंतर पर तीनों सेनाओं के करीब 1,000 सेवानिवृत्त सैनिकों ने विरोध प्रदर्शन किया और अपने वीरता पदकों को इकट्ठा किया।

सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा ने बताया, "जीवन की परवाह किए बिना हम देश के लिए लड़े और अब अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए इकट्ठा हुए हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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