गिनीज़ बुक में मिजो़ डांस

गिनीज़ बुक में मिजो़ डांस

सुबीर भौमिक

बीबीसी संवाददाता, कोलकाता

मिज़ोरम के लोग सदियों से ही चेराव बाँस नृत्य करते रहे हैं लेकिन शुक्रवार को उन्होंने इसे गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में शामिल करा दिया.

राजधानी आइजोल में गिनीज़ की एक प्रतिनिधि की उपस्थिति में 10,736 लोगों ने चेराव नृत्य किया.

इस रिकॉर्ड प्रदर्शन के लिए आइजोल स्थित असम राइफ़ल्स का मैदान छोटा पड़ गया. नर्तक मैदान के बाहर तीन किलोमीटर तक फैले हुए थे.

दरअसल मैदान में तो मात्र 2,518 ही समा पाए, बाक़ी 8,224 नर्तक मैदान के बाहर ही थे. कुछ देर के रिहर्सल के बाद दस हज़ार से ज़्यादा इन नर्तकों ने आठ मिनट तक सामूहिक नृत्य किया.

राज्य के कला और संस्कृति निदेशक बोइछिंगपुई ने आइजोल के नर्तकों की इस उपलब्धि पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए कहा, "मिज़ोरम के लिए ये एक बड़ा दिन है. हमारी अनूठी संस्कृति और नृत्यकला को बड़ी पहचान मिली है."

पारंपरिक नृत्य पोशाक

मौक़े पर मौजूद गिनीज़ बुक की प्रतिनिधि लुशिया साइनिगैलिएसी ने कहा, "बाँस नृत्य का ये दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा आयोजन था."

उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड बनाने के लिए नृत्य का मूल स्वरूप में होना और नर्तकों का पारंपरिक नृत्य पोशाक पहनना ज़रूरी था.

गिनीज़ बुक के प्रतिनिधि ने बाद में मिज़ोरम के कला और संस्कृति मंत्री पीसी ज़ोरमसंगलियाना को सामूहिक चेराव नृत्य के विश्व रिकॉर्ड का सर्टिफ़िकेट सौंपा.

रिकॉर्ड बनाने वाले नर्तकों में यंग मिज़ो एसोसिएशन के सदस्य तथा स्कूल-कॉलेजों के छात्र शामिल थे.

आइजोल में हुए इस आयोजन को देखने के लिए हज़ारों की संख्या में दर्शक में जमा हुए थे.

अभी एक दिन पहले ही मिज़ोरम में चपचर कुत का त्योहार पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था.

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