भारत के खिलाफ युद्ध था मुंबई हमला : अभियोजन (लीड-1)
अपनी अंतिम जिरह को दूसरे दिन जारी रखते हुए विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम ने इस संदर्भ में मुंबई हमले के दौरान एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकी अजमल आमिर कसाब के कबूलनामे का हवाला दिया। कसाब के बयानों के अनुसार इस आतंकी हमले के पीछे का इरादा सरकार को उखाड़ फेंकना और देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना था।
निकम ने कहा कि कसाब ने यह भी स्वीकार किया है कि पाकिस्तान में प्रशिक्षण के दौरान आतंकियों को बताया गया था कि इस हमले के पीछे का इरादा कश्मीर को आजाद कराना है।
निकम ने कहा कि आकाओं और आतंकियों के बीच हुई बातचीत से भी इस बात की पुष्टि होती है कि हमले का मकसद कश्मीर को आजाद करना था। निकम ने कहा, "हमले के पीछे के मकसद को यह स्पष्ट रूप से सामने लाता है। लिहाजा युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया जा सकता है।"
निकम ने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का भी हवाला दिया, जिसमें भारतीय संसद पर हुए हमले का मामला भी शामिल है। निकम ने कहा कि संसद पर हमले के मामले में अदालत ने आरोपियों के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोपों को उचित ठहराया था।
निकम ने कहा, "वही स्थिति इस मामले में भी है। हमले का मकसद भय पैदा करना था और इसलिए यह धारा आरोपी कसाब और सह आरोपी सबाउद्दीन अहमद व फहीम अंसारी पर लागू होती है।"
इस पर विशेष न्यायाधीश एम.एल.तहिलयानी ने कहा कि वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले में केवल भारतीय शामिल थे।
उन्होंने कहा, "लेकिन यहां मुद्दा यह है कि क्या इस अदालत में किसी विदेशी नागरिक पर युद्ध छेड़ने के आरोपों का मामला चलाया जा सकता है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला भारतीयों के बारे में बात करता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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