इसराइल और सीरिया चाहते हैं परमाणु ऊर्जा

इसराइल और सीरिया चाहते हैं परमाणु ऊर्जा

इसराइल और सीरिया परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करना चाहते हैं. इसराइल के एक वरिष्ठ मंत्री उज़ी लेन्डाउ ने यह बात पेरिस में हो रहे परमाणु सम्मेलन में कही.

इस सम्मेलन में सीरिया के विदेश उपमंत्री फ़ैसल मिकदाद ने कहा कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर कुछ ही देशों का एकाधिकार नहीं होना चाहिए.

इसराइल, बिजली पैदा करने के लिए भारी मात्रा में कोयले का आयात करता है. पर्यावरण प्रदूषण की चिंताओं के कारण नए ताप बिजली संयंत्र लगाना मुश्किल हो रहा है इसलिए उसे अन्य विकल्पों की तलाश है.

परमाणु ऊर्जा की चर्चा इसराइल में पहले भी हुई है लेकिन आगे नहीं बढ़ पाई. इसका कारण ये है कि बिजली पैदा करने का रिएक्टर लगाने के लिए उसे विदेशी सहायता की ज़रूरत पड़ेगी.

इसराइल यूं तो अंतर्राष्ट्रीय आणविक ऊर्जा एजेंसी आईएईए का सदस्य है लेकिन उसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. समझा जाता है कि उसके पास परमाणु हथियार भी हैं. इसराइल ने न कभी इसकी पुष्टि की है और न ही इससे इंकार किया है.

बदले संदर्भ

इसराइल के पास दो परमाणु रिएक्टर हैं. एक तेलअवीव के पास है जो अंतर्राष्ट्रीय जांच के लिए खुला हुआ है और दूसरा डिमोना संयंत्र है जहां संभवत: परमाणु हथियार बनाए गए हैं. यह रिएक्टर देश के दक्षिण में स्थित है.

कुछ समय पहले तक इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि परमाणु ऊर्जा विकसित करने के लिए कोई देश इसराइल की मदद करेगा. लेकिन जब से भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौता हुआ है तब से पूरा संदर्भ ही बदल गया है.

इसराइल को लगता होगा कि अगर वो भविष्य में ऐसा कोई संयंत्र लगाता है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी क्योंकि हाल के वर्षों में उसकी मिसाइल भेदी क्षमता में भारी सुधार हुआ है.

सीरिया की पृष्ठभूमि

सीरिया भी परमाणु ऊर्जा विकसित करना चाहता है. लेकिन उसकी परमाणु पृष्ठभूमि काफ़ी जटिल है. यह माना जाता है कि सन 2007 में जिस इमारत पर इसराइल ने बम हमला किया था वह निर्माणाधीन परमाणु रिऐक्टर था.

हालांकि सीरिया ने इस बात का ज़ोरदार खंडन किया था. लेकिन मामले की जांच के लिए सीरिया ने आईएईए के साथ पूरी तरह सहयोग नहीं किया है इसलिए शंका बनी हुई है.

इसराइल के मंत्री उज़ी लेन्डाउ ने यहां तक कहा कि इसराइल और अपने कुछ अरब पड़ोसियों के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा उपक्रम कर सकता है.

हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने यह इसलिए कहा जिससे एक विवादास्पद प्रस्ताव को हज़म करने योग्य बनाया जा सके या फिर वो सचमुच मध्यपूर्व में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए परमाणु परियोजना का इस्तेमाल करना चाहते हैं.

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