बड़ी लड़ाई के बाद तालिबान के महत्वपूर्ण अड्डे पर कब्जा
दामादोला (पाकिस्तान), 4 मार्च (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में नाटो सेनाओं पर हमलों के लिए आधार शिविर के रूप में उपयोग हो रहे बाजौर क्षेत्र के दामदोला स्थित तालिबान के एक महत्वपूर्ण अड्डे पर पाकिस्तानी सेना ने छह फरवरी को कब्जा कर लिया।
सीमा क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे अर्धसैनिक बल फ्रंटियर कोर के प्रमुख तारिक खान ने कहा कि अफगान सीमा के काफी निकट स्थित यह बड़ी गुफा दर्जनों सुरंगों से जुड़ी है। इस ठंडे पहाड़ी इलाके में आतंकवादियों की यह एक प्रमुख शरणस्थली थी।
अफगानिस्तान के कुनार या बाजौर के अन्य हिस्सों से लड़ाई में हिस्सा लेने के बाद तालिबान लड़ाके यहां आराम करते थे। यहां आतंकवादियों का भोजन तैयार करने के लिए एक रसोई थी और लड़ाई में जाने के लिए उनको दो 'नान' रोटियां और एक बड़ी बोतल में पानी दिया जाता था।
गुफा के मुंह को सावधानीपूर्वक छिपाया गया था जिससे अमेरिकी और पाकिस्तानी विमान उसे पहचान न सकें।
बाजौर के एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2006 में एक मदरसे पर अमेरिकी हवाई हमले के समय अलकायदा का दूसरे नंबर का नेता अयमान अल जवाहिरी इसी परिसर के समीप मौजूद था। उस हमले में 80 लोगों की मौत हुई थी। यह अड्डा करीब 150 आतंकवादियों के पनाह लेने के काम आ सकता है।
इस अड्डे पर कब्जे के बाद पहली बार दिए गए आधिकारिक बयान में खान ने कहा कि आतंकवादियों का यह प्रमुख अड्डा था, जहां अलकायदा के आतंकवादी खुलेआम आते-जाते थे।
पाकिस्तानी सेना ने करीब एक हफ्ते की लड़ाई में अलकायदा और तालिबान आतंकवादियों को मारकर दामदोला अड्डे पर कब्जा किया। दामदोला पर कब्जा बाजौर में पाकिस्तानी सेना द्वारा अगस्त 2008 में शुरू किए गए सैन्य अभियान का चरम बिंदु है। इस अभियान में अब तक 2,200 आतंकवादी और 149 सैनिक मारे जा चुके हैं।
खान ने कहा कि दामदोला से लगे छह वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को उनके सैनिकों द्वारा सुरक्षित किए जाने के बाद बाजौर आतंकवादियों से मुक्त हो गया है।
खान ने कहा कि इलाके के करीब 25 प्रतिशत आतंकवादी अफगानिस्तान और 15 प्रतिशत स्वात और अन्य इलाकों में भाग गए। शेष को मार दिया गया। बाजौर में करीब 5,000 आतंकवादियों के होने का अनुमान था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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