बुन्देलखंड के 56 हजार किसानों पर करोड़ों रुपये का कर्ज
पिछले पांच साल से बुन्देलखंड के किसान सूखे का दंश झेल रहे हैं। इस साल खरीफ की फसल भी जवाब दे गई। आषाढ़ में पानी न बरसने से ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, उड़द व अरहर की बुआई से वे किसान वंचित हो गये, जिन्होंने पहली बरसात में बीज बोया। चूंकि बारिश न होने से वह भी बरबाद हो गया, परिणामस्वरूप किसानों के सामने रबि की फसल की जुताई, बुआई, सिंचाई और खाद की समस्या खड़ी हो गई। नतीजन किसान को सहकारी समितियों और व्यावसायिक बैंकों से फसली ऋण लेना पड़ा।
इस समय किसान क्रेडिट कार्ड व फसली ऋण में चित्राकूटाम मंडल के 56 हजार 65 किसान सरकारी कर्जदार बन चुके हैं। जो 20 हजार से दो लाख रुपये तक का कर्ज लिए हैं। इनमें सर्वाधिक 22 हजार 675 किसान बांदा जिले के हैं। हमीरपुर में 15 हजार 324, महोबा में 10 हजार 943 और चित्राकूट में 7 हजार 123 किसान कर्जदार बने हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के अलावा सहकारी समितियों व व्यावसायिक बैंकों से फसली ऋण के रूप में मंडल में कर्ज की यह रकम एक अरब 25 करोड़ 47 लाख रुपये है। फसली ऋण में महोबा के किसान सर्वाधिक कर्जदार हैं। यहां 50 करोड़ 81 लाख रुपये कर्ज लिया गया। हमीरपुर 36 करोड़ 10 लाख, बांदा में 28 करोड़ 56 लाख 10 हजार और चित्रकूट में 9 करोड़ 99 लाख 90 हजार रुपये किसान कर्ज ले डाले हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और तिन्दवारी के विधायक विश्वम्भर प्रसाद निषाद ने कहा, "केन्द्र व राज्य सरकार को किसानों के सभी प्रकार के सरकारी कर्जे माफ कर देना चाहिए।" उन्होंने कहा, "इस मुद्दे को कार्य स्थगन प्रस्ताव के दौरान भी मैंने विधानसभा के सदन में उठाया है।"
प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह का कहना है, "कर्ज के बोझ में दबे किसान आत्महत्या को मजबूर होंगे।" तेन्दुरा गांव के किसान रामलखन सिंह का कहना है कि यहां का किसान भगवान भरोसे हैं, फसल में दम नहीं है।
आयुक्त ओपी सिंह का कहना है कि यह ऋण किसानों को सहायता है, इससे किसान को राहत मिली है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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