आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को संपत्ति का ब्योरा देने का आदेश
कांग्रेस नेता चौधरी राकेश सिंह ने बल्लभ भवन के 85 आईएएस अधिकारियों और पुलिस मुख्यालय के 39 आईपीएस अधिकारियों की पदस्थापना से तीन साल पहले की संपत्ति का ब्योरा सूचना के अधिकार के तहत मांगा था। चौधरी जब लोक सूचना अधिकारियों से यह ब्योरा हासिल करने में असफल रहे तो उन्होंने राज्य सूचना आयोग के यहां अपील की।
अपील पर आयोग ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर जवाब मांगा तथा सुनवाई का अवसर दिया। इस पर कुछ अधिकारियों ने अपना जवाब देते हुए कहा कि उनकी संपत्ति का ब्योरा अपीलकर्ता को देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। वहीं अधिकांश इससे सहमत नहीं हुए।
मामले की सुनवाई के बाद सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए तिवारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने विधायक और सांसद पद के उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने की व्यवस्था दी है। ऐसा लोकतंत्र में कैंसर रूपी भ्रष्टाचार के निदान के लिए खुलापन को आवश्यक मानकर किया गया है।
आदेश में आगे कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सांसद एवं विधायक पद के उम्मीदवारों के लिए एक मापदण्ड और अन्य लोक सेवकों के लिए दूसरा मापदण्ड कैसे हो सकता है। संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार देश के सभी नागरिकों के लिए समान है। आयोग इस बात से सहमत नहीं है कि ऐसे लोगों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक होने से उनकी निजता पर अनावश्यक अतिक्रमण होता हैं।
मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा जारी किए गए आदेश में आगे कहा गया है कि उच्च पदों पर आसीन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं, इससे आम आदमी का चिंतित होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में नागरिक को यह जानने का हक है कि पद और सत्ता पर आसीन होने के समय और बाद में अर्जित संपत्ति क्या है। उन्होंने लोक प्राधिकारियों को संबंधित अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा अपीलकर्ता को 15 दिन और आयोग को एक माह में देने के आदेश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि लोकसेवक अनिवार्य और आवश्यक रूप से प्रतिवर्ष अपनी संपत्ति का विवरण दें। साथ ही इसे सार्वजनिक करने के लिए बेवसाइट पर डाली जाए।
अपीलकर्ता चौधरी राकेश सिंह ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है और इससे प्रदेश में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। लोकतंत्र में लोकसेवकों की असली मालिक जनता है और उसे उनके बारे में जानने का हक है। संपत्ति का ब्योरा आने से पारदर्शिता आएगी और गड़बड़ियां रूकेंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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