मेडिकल कचरे के लिए 4 करोड़ डॉलर की परियोजना
संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) की ओर से गुरुवार को जारी की गई एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि पांच वर्षीय यह परियोजना गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा और पंजाब में क्रियान्वित होगी। बेंगलुरू का एम.एस.रामैया मेडिकल कॉलेज इस परियोजना में राष्ट्रीय क्रियान्वयन इकाई की भूमिका निभाएगा।
इस परियोजना के तहत प्रत्येक राज्यों में चार बड़े, आठ मध्यम और 16 छोटे अस्पतालों को लाभ मिलेगा।
एजेंसी के महानिदेशक कांदेह के.यमकेला ने कहा है, "भारत में प्रति वर्ष 300,000 टन से अधिक मेडिकल कचरा पैदा होता है। यूएनआईडीओ की यह पर्यावरण अनुकूल परियोजना खतरनाक मेडिकल कचरों के प्रबंधन और उसे ठिकाने लगाने में मददगार साबित होगी।"
यमकेला ने निजी क्षेत्र से भी इस परियोजना में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है, "जैविक कचरे के पर्यावरण अनुकूल निपटान के लिए हमें सिर्फ लोगों को गुणवत्ता के प्रति सतर्क रहने का प्रशिक्षण देने की ही जरूरत नहीं है, बल्कि इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी की भी आवश्यकता है।"
यमकेला ने कहा है, "पश्चिमी देशों में जैविक मेडिकल कचरे के निपटान की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र ही निभाते हैं। इस कारण अस्पताल चिकित्सा के मामलों पर अपना अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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