उमर अब्दुल्ला ने किया आजाद पर पलटवार
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा है कि पाकिस्तान से लौटने वाले युवकों के आम माफी और पुनर्वास पर कोई निर्णय लेना केंद्रीय गृह मंत्रालय का काम है।
कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, "यह मामला हमारे (राज्य सरकार) और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच का है। इससे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कुछ भी लेना-देना नहीं है। इस मुद्दे पर बोलने का अधिकार गृह मंत्रालय को है।"
अब्दुल्ला ने पिछले सप्ताह अपने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रस्ताव दिया था कि जो कश्मीरी युवक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी प्रशिक्षण के लिए चले गए थे और अब वे बगैर हथियार के लौटना चाहते हैं और समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उनके आत्मसमर्पण और पुनर्वास के लिए एक नीत बनाई जा सकती है।
जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को अपने जम्मू दौरे के दौरान कहा था कि पाकिस्तान से लौटने वाले आतंकियों का आत्मसमर्पण राज्य में सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा खड़ा कर सकता है।
आजाद ने सवाल किया था, "इस बात की गारंटी कौन लेगा कि ये युवक आतंकी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेंगे? क्या हमें पाकिस्तान पर भरोसा करना चाहिए? क्या यह हथियारबंद युवकों की घुसपैठ का एक तरीका नहीं होगा?"
ज्ञात हो कि 1990 के दशक के शुरुआत में सैकड़ों कश्मीरी युवक सीमा लांघ कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में शस्त्र प्रशिक्षण के लिए चले गए थे। कानूनी कार्रवाई के डर से वे वापस नहीं लौटे। जबकि उस क्षेत्र का दौरा कर चुके लोगों का कहना है कि वे युवक बहुत बुरे हालात में जीवन बसर कर रहे हैं और यदि सरकार उन्हें माफी दे दे तो वे अपने घर लौटना चाहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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