नाउम्मीदी से घिरे लोगों में जगी उम्मीद की आस
चिल्कापुर की जनसभा में जुटी भीड़ में जनजाति वर्ग का 60 वर्षीय दामजी भी थे। उन्हें नेताओं की बातों पर भरोसा नहीं है और अगर उन्हें किसी से उम्मीद है तो वह सिर्फ भगवान से है। दामजी के चेहरे पर पड़ी हुई झुर्रियां उनके उम्र की गवाही दे जाती है। इतना ही नहीं आंखों की रोशनी मद्धिम पड़ चुकी है और हताशा ने उनकी जिंदगी को घेर लिया है।
राजनी गांव के दामजी को जब पता चला कि उनके पास के गांव चिल्कापुर मुख्यमंत्री चौहान आ रहे हैं तो वह भी वहां पहुंच गए। आयोजन स्थल तक पहुंचने के लिए उनका सहारा बनी थी लाठी और गांव के कुछ लोग।
दामजी ने धोती तो गंदी पहन रखी थी मगर पुरानी शर्ट के ऊपर नई शर्ट सिर्फ इसलिए पहनी ताकि कोई उनका उपहास न उड़ाए। आयोजन स्थल पर लगी तस्वीरों को देखकर और मंच से भाषण दे रहे नेताओं की बातें सुनकर उसके मुंह से निकल ही आया कि अब उन्हें नेताओं की बात पर भरोसा नहीं रहा है।
इसके बाद मुख्यमंत्री चौहान ने जब प्रदेश के हालातों का जिक्र कर कहा कि वह इस दफा देने नहीं बल्कि कुछ मांगने आए हैं, वह भी प्रदेश की खातिर। यह सुनते ही दामजी को अपने होने का एहसास हुआ और वह कहने लगा कि चलो कोई तो ऐसा है जो वोट के अलावा प्रदेश के लिए हम जैसे गरीबों से कुछ मांग रहा है।
दामजी के पास 10 एकड़ खेती है मगर वह दाने-दाने के लिए मोहताज हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि खेती के लिए सिंचाई का कोई इंतजाम नहीं है। फसल अच्छी होगी या खराब यह सब ऊपर वाले पर निर्भर है। वह कहते हैं कि उनकी जिंदगी और दाल रोटी ऊपर वाले की ही मर्जी से चलती है।
पिछले 50 सालों से वह नेताओं के वादे सुनते आ रहा हैं मगर उनकी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है। दामजी अपनी पत्नी मंगो के साथ जिंदगी को किसी तरह काट लेना चाहते हैं। साथ ही वह कहते भी हैं कि अगर नेताओं में बदलाव आ जाए तो प्रदेश की दशा बदलने में देर नहीं लगेगी।
वहीं पांढर में आयोजित सभा के दौरान एक जनजाति परिवार ने अपना दुखड़ा अफसरों को सुनाया। परिवार की नाराजगी सिर्फ इस बात को लेकर थी कि सरकार घोषणाएं करती है मगर उन्हें हक नहीं मिल रहा है। इस परिवार की एक बेटी विकलांग है और उसे इलाज की सुविधा के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
शिवराज सिंह चौहान इन दिनों लोगों को प्रदेश के विकास में भागीदार बनने के लिए मध्य प्रदेश बनाओ यात्रा निकाल रहे हैं। डिंडौरी और अलीराजपुर के बाद बैतूल में इस यात्रा का तीसरा चरण पूरा हो चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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