राष्ट्रीय स्वास्थ्य बिल 2009 पर चर्चा

कार्यक्रम में राष्ट्रीय बिल के प्रारूप, बिल की जरूरत और बिल के कानूनी ढांचे पर विचार विमर्श हुआ। परिचर्चा में यह भी बात हुई की स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में सरकार की क्या जिम्मेदारियां हैं और नागरिक इस संबंध में सरकार से क्या मांगें कर सकते हैं।
चर्चा में बिल के मूलभूत प्रावधानों, मौजूदा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के अच्छे और बुरे पहलुओं पर भी बात हुई। चर्चा मे उभर कर सामने आया कि कैसे ये बिल समाज के कमज़ोर और अधिकारहीन लोगों तक अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बिल 2009 का प्रारूप तब बना जब ये बात खुलकर सामने आने लगी है कि तेज़ी से हो रही आर्थिक वृद्घि के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं की असमान उपलब्धता बनी हुई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में ये असमानता, सुविधाओं की उपलब्धता में कमी और पूरी स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ा हुआ है।












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