देशभर के बेघर लोगों की दशा पर रिपोर्ट तलब (लीड-1)
न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन की खण्डपीठ ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर रैन बसेरों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है और एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
अदालत ने यह नोटिस दो पूर्व नौकरशाह एन.सी. सक्सेना और हर्ष मंदर की रिपोर्ट के बाद जारी किया है। अदालत ने इन दोनों व्यक्तियों को विशेष आयुक्त के रूप में नियुक्त कर राष्ट्रीय राजधानी में बेघर लोगों की दशा पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।
इन दोनों आयुक्तों ने अपनी जांच को विस्तार देते हुए अदालत के समक्ष रिपोर्ट दाखिल की और दिल्ली के संदर्भ में 20 जनवरी को दिए गए आदेश की ही तरह विभिन्न राज्य सरकारों के लिए भी इसी तरह के आदेश जारी करने की मांग की।
अदालत में दाखिल अपनी रिपोर्ट में दोनों आयुक्तों ने कहा, "बेघर लोगों को आसमान के नीचे खुले में छोड़ देना सम्मान के साथ जीने के अधिकार से वंचित करना होगा।"
आयुक्तों ने अपनी रिपोर्ट में मांग की कि राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि प्रति एक लाख शहरी आबादी पर कम से कम एक रैन बसेरे का निर्माण किया जाए, जिसमें सभी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हों।
रिपोर्ट में आयुक्तों ने कहा कि सभी राज्यों में प्रति 20,000 की शहरी आबादी पर कम से कम एक सामुदायिक भोजनालय की व्यवस्था होनी चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बेघरों को आश्रय उपलब्ध कराना संविधान के तहत प्रदत्त जीने के अधिकार का हिस्सा है और उसके अनुसार प्रत्येक राज्य को बेघरों को रैन बसेरा उपलब्ध कराना चाहिए।
ज्ञात हो कि बेघर लोगों को आश्रय सुलभ न करा पाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जनवरी को दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया था। अदालत ने सरकार को आदेश दिया था कि वह सभी बेघर लोगों के लिए तत्काल रैन बसेरों की व्यवस्था करे जिनमें भोजन और शौचालय की सुविधा भी हो।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications