मनमोहन जाएंगे सऊदी अरब, प्रत्यर्पण संधि पर करेंगे चर्चा
नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह फरवरी महीने के आखिरी सप्ताह में सऊदी अरब का दौरा कर सकते हैं। नए वर्ष में यह उनका पहला विदेश दौरा होगा। प्रधानमंत्री के इस दौरे में चर्चा का प्रमुख केंद्र सऊदी अरब के साथ प्रत्यर्पण संधि और भारत में भारी निवेश का मुद्दा रहेगा।
जानकार सूत्रों ने आईएएनएस को बताया, "प्रधानमंत्री का दौरा अभी विचाराधीन है। वह फरवरी के अंत में या मार्च की शुरुआत में वहां जा सकते हैं। हम इसे अंतिम रूप दे रहे हैं।"
प्रधानमंत्री यदि सऊदी अरब के दौरे पर जाते हैं तो यह 1982 के बाद पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा होगा। इससे पहले इंदिरा गांधी वहां गई थीं। ज्ञात हो कि सऊदी अरब भारत की 30 फीसदी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करता है।
सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज अल-सऊद वर्ष 2006 में भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ एक दूसरे को सहयोग देने और दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। दोनों देश इस संधि पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
सूत्र ने कहा, "संधि का मसौदा तैयार कर लिया गया है। इसमें सिर्फ कुछ औपचारिकताएं बाकी रह गई हैं।"
इस संधि को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी दे दी जाएगी। इस संधि के हो जाने से भारत दाऊद इब्राहिम जैसे अंडरवर्ल्ड सरगना पर शिकंजा कस सकता है।
इसके अलावा बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सऊदी अरब की कुछ कंपनियों द्वारा निवेश के मुद्दे पर चर्चा होगी। निवेश संबंधी प्रस्तावों पर अगले महीने होने वाले दो दिवसीय इंडो-अरब सम्मेलन में भी चर्चा होगी। इस सम्मेलन के दौरान भारत की ओर से खाड़ी के देशों में नौ अरब डॉलर के निवेश का प्रस्तान देने की योजना है। भारतीय कपंनियों ने वहां पहले ही दो अरब डॉलर का निवेश किया हुआ है।
सऊदी अरब सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान व तकनीक तथा ज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भारत का सहयोग चाहता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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