तीव्र न्यायिक प्रणाली शुरू, पहले दिन 6 कैदी रिहा
यह प्रक्रिया जेलों में कैदियों की भारी भीड़, बड़ी संख्या में लंबित मामलों और न्यायिक प्रणाली में होने वाली लेटलतीफी के मद्देनजर शुरू की गई है। यह पहल केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री एम.वीरप्पा मोइली की ओर से शुरू की गई है। इस तरह की पहली रिहाई के समय मोइली बुधवार को स्वयं पटियाला हाउस अदालत परिसर में मौजूद थे।
इस अवसर पर मोइली ने कहा, "यह एक सुधारवादी प्रक्रिया है और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।"
अतिरिक्त मुख्य महानगरीय दंडाधिकारी अजय पांडे की अदालत में बुधवार को 43 मामले सूचीबद्ध थे। सभी मामले मामूली अपराधों से संबंधित थे। इस सूची में उन कैदियों के नाम शामिल थे, जो अभी तक इसलिए जेल में पड़े हुए थे, क्योंकि वे अपनी जमानत राशि नहीं जुटा सकते थे।
छह कैदियों को इस प्रयास के हिस्से के रूप में बुधवार को रिहा कर दिया गया।
मोइली ने कहा, "हम 31 जुलाई तक देश भर में 1.7 लाख कैदियों की रिहाई की योजना बना रहे हैं। इसकी शुरुआत करने के लिए हमने सभी अदालतों और कानूनी सेवा प्राधिकरणों को रिहा करने लायक कैदियों की सूची तैयार करने के लिए सूचित कर दिया है।"
कानून मंत्री की योजना उन सभी मामलों को तेजी के साथ निपटाने की है, जो जघन्य अपराधों से संबंधित नहीं हैं।
मोइली ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कानून मिशन को सक्रिय करने और उसे लागू करने पर सहमति जताई है। "यह एक ऐसा कदम है, जिसके तहत जेलों में बंद कैदियों सहित हर नागरिक को न्याय सुलभ कराने की गारंटी देनी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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