महंगाई पर चारों तरफ से घिरी सरकार

कृषि मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि सरकार के पास इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं है। इसी बीच, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा आगामी 27 जनवरी को महंगाई के मुद्दे पर मुख्यमंत्रियों की बुलाई गई बैठक भी स्थगित कर दी गई है। यह बैठक अब छह फरवरी को होगी।
महंगाई के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री द्वारा सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बुलाई गई बैठक स्थगित कर दी गई है और यह बैठक अब छह फरवरी को होगी। पहले इस बैठक की तिथि 27 जनवरी निर्धारित की गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया, "लगातार खराब होते मौसम के चलते 27 जनवरी की बैठक को स्थगित कर दिया गया है। यह बैठक अब छह फरवरी को होगी।"
विपक्ष ने कृषि मंत्री को जिम्मेदार ठहराया
उल्लेखनीय है कि आवश्यक खाद्य पदार्थो की लगातार बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर केंद्र सरकार सभी राजनीतिक दलों के निशाने पर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी तो उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने बढ़ती महंगाई के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को जिम्मेदार ठहराया था।
मायावती ने तो यह चेतावनी तक दी थी कि प्रधानमंत्री ने यदि पवार को उनके पद से नहीं हटाया तो वह 27 जनवरी की बैठक का बहिष्कार करेंगी। कृषि मंत्री ने मायावती पर पलटवार करते हुए कहा कि कच्ची चीनी के आयात के संबंध में लिए गए फैसले से मायावती नाराज हैं, इसलिए उन्होंने इस प्रकार का बयान दिया है।
पवार ने किया खंडन
पवार ने उन खबरों का भी खंडन किया जिसमें उनके हवाले से कहा गया था कि उत्तर भारत में दूध की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। पवार ने ग्रामीण विकास के एक सम्मेलन से इतर पत्रकारों से चर्चा में कहा, "उत्तर भारत में दूध की कीमतें बढ़ेंगी, यह मीडिया की उपज है। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि उत्तर भारत में दूध की मांग व उसकी आपूर्ति में अंतर है।"
उन्होंने कहा, "दूध की कीमतें बढ़ाने के संबंध में हमारे पास कोई प्रस्ताव नहीं है।" पवार ने बुधवार को संकेत दिया था कि उत्तर भारत में दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं। राज्यों के पशुपालन व डेयरी मंत्रियों के सम्मेलन में उन्होंने कहा था, "उत्तर भारत में दूध की पर्याप्त उपलब्धता की समस्या का हमें सामना करना पड़ रहा है। इसकी मांग व आपूर्ति में 18 लाख टन का अंतर है।"
ज्ञात हो कि गुरुवार को ही आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर महिला सांसदों ने भी अपनी चिंता व्यक्त की। अपनी चिंता जाहिर करते हुए इन सांसदों कहा कि वे स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों से संतुष्ट नहीं हैं।
सरकार के प्रयास की जरूरत
केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार में सहयोगी तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, "सरकार को और प्रयास करना चाहिए।" पश्चिम बंगाल की बारासात सीट से लोकसभा सांसद दस्तीदार ने कोलकाता से फोन पर आईएएनएस से कहा, "गरीब लोगों के लिए यह बहुत कठिन समय है। बढ़ती कीमतों की वजह से मध्यवर्गीय लोग भी अधिक प्रभावित हुए हैं।"
उन्होंने कहा कि सूखा और वैश्विक आर्थिक मंदी ने भी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि में भूमिका निभाई है। इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त कदम न उठाए जाने को लेकर दस्तीदार ने पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार की आलोचना की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी बढती महंगाई पर अपनी चिंता जाहिर की।
दूध की कीमतों में वृद्धि होने के पवार के संकेत के बारे में कुमार ने कहा कि उनके राज्य में दूध के दाम नहीं बढ़ेंगे। उन्होंने कहा राज्य में दूध की कोई कमी नहीं है। पटना में गुरुवार को मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के किसी भी बयान से मूल्य पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार और कृषि मंत्री महंगाई कम करने के लिए क्या कर रहे हैं, ये वे लोग ही जानें।
नीतीश ने कहा कि महंगाई पर नियंत्रण करने का काम केन्द्र सरकार का है परंतु केन्द्र सरकार इसका ठिकरा राज्य सरकारों पर फोड़ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महंगाई कम करने के लिए क्षमता अनुसार प्रयास कर रही है। उन्होंने पवार के उस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया जिसमें उन्होंने दूध की कमी के कारण दूध के दाम बढ़ने की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में दूध की कोई कमी नहीं है और न ही फिलहाल राज्य में दूध के दाम बढ़ेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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