बेघर लोगों को तत्काल आश्रय सुलभ कराए सरकार : सर्वोच्च न्यायालय (लीड-2)

न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी और न्यायमूर्ति के.एस.राधाकृष्णन ने सरकार को आदेश दिया है कि वह फौरी तौर पर सभी रैन बसेरों को सक्रिय करे और उन स्थलों के बारे में तत्काल टेलीविजन और पिंट्र मीडिया में विज्ञापन जारी करे, ताकि बेघर लोग वहां पहुंच सकें।

पीठ ने सुझाव दिया है कि सरकार सभी खाली पड़ी सरकारी इमारतों को रैन बसेरों के लिए इस्तेमाल कर सकती है। अदालत ने सरकार को रैन बसेरों में कंबल, भोजन, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित कराने के लिए कहा है।

ज्ञात हो कि नगर प्रशासन दिल्ली में 40 रैन बसेरों का संचालन करता है। लेकिन इन रैन बसेरों की कुल क्षमता राजधानी के कोई 150,000 बेघर लोगों के एक छोटे-से हिस्से को भी शरण देने के लिए नाकाफी है। दूसरी ओर राजधानी में शीत लहर लगातार जारी है और बुधवार को निम्नतम तापमान 6.6 डिग्री दर्ज किया गया।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश अदालत आयुक्तों, एन.सी.सक्सेना और हर्ष मंदर द्वारा ठंड में बेघर लोगों की कठिनाइयों के बारे में सौंपी गई एक रिपोर्ट के आधार पर दिया है।

पीठ ने 13 जनवरी की इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए बुधवार को पहले दिल्ली के खाद्य सचिव जयश्री रघुरमन को अपराह्न् दो बजे अदालत में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया।

अतिरिक्त महाधिवक्ता मोहन परासरन सरकार की ओर से अदालत में उपस्थित हुए। परासरन ने अदालत को बताया कि उन्होंने दिल्ली के अधिकारियों से इस मुद्दे पर बातचीत की है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए कोई निर्णय लेने हेतु एक आपात बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी रैन बसेरों को सक्रिय करने और उन्हें पूरी तरह सुसज्जित करने के उपायों पर चर्चा करेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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