'पाक राष्ट्रपति के कार्यालय को अभियोग से दूर रखा जाए'
स्थानीय दल 'वतन पार्टी' के बैरिस्टर जफरुल्लाह ने सोमवार को पाक सर्वोच्च न्यायालय की लाहौर रजिस्ट्री में एक याचिका दायर की। उन्होंने अपनी याचिका में दलील दी है कि पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद- 242 के तहत राष्ट्रपति को कोई भी अदालत तलब नहीं कर सकती क्योंकि वह राष्ट्राध्यक्ष होता है।
पिछले दिनों पाक सर्वोच्च न्यायालय ने विवादास्पद 'राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश' (एनआरओ) को अवैध ठहराते हुए लगभग 250 नेताओं, नौकरशाहों और सेना के पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने का आदेश दिया था। यह अध्यादेश अक्टूबर, 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा लाया गया था।
बीते सोमवार को समाचार एजेंसी ऑनलाइन ने खबर दी थी कि किसी ने राष्ट्रपति जरदारी को पद से हटने की सलाह दी थी। इस पर जरदारी ने कहा था, "अदालत का फैसला मेरे खिलाफ या पक्ष में आए, मैं इसकी परवाह नहीं करता। मैं सभी चुनौतियों का सामना करूंगा। मैं इसका आदी हो चुका है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications