प्रधानमंत्री कनिष्ठ मंत्रियों की शिकायतें सुनेंगे
उल्लेखनीय है कि मनमोहन सरकार के कुछ कनिष्ठ मंत्री अपने पास काम न होने की शिकायत करते हैं तो कुछ की शिकायत हैं कि नीतिगत फैसलों में उनके वरिष्ठ मंत्री उनसे राय नहीं लेते।
प्रधानमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "प्रधानमंत्री निजी तौर पर कनिष्ठ मंत्रियों की बात सुनना चाहते हैं। वह जानना चाहते हैं कि नीतिगत फैसलों में उनकी भूमिका कितनी होती है। वह यह भी समझना चाहते हैं कि वरिष्ठ मंत्री अपने कनिष्ठों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।"
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री की मंत्रिपरिषद में कुल 78 सदस्य हैं। इनमें प्रधानमंत्री सहित 33 को कैबिनेट और 38 को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त है जबकि सात स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री हैं।
सूत्रों के मुताबिक कई कैबिनेट मंत्रियों को अपने मंत्रालय को चलाने के लिए समय नहीं होता। इसका नतीजा यह होता है कि कनिष्ठ मंत्रियों तक न तो कोई फाइल पहुंच पाती है और न ही उनका कुछ कहना माना जाता है।
कैबिनेट सचिवालय के एक अधिकारी ने कहा, "कई कैबिनेट मंत्रियों का प्रदर्शन बहुत अच्छा है जबकि सामाजिक न्याय व अधिकारिता, ग्रामीण विकास, जल संसाधन और रेलवे मंत्रालय का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।"
गत वर्ष मई महीने में केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की लगातार दूसरी बार कमान संभालने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि वह छह महीने के भीतर ऐसी प्रक्रिया विकसित करेंगे जिससे राज्यमंत्री अपनी प्रभावी भूमिका का निर्वाह कर सकेंगे और नीतिगत फैसलों में वरिष्ठ मंत्रियों का हाथ बंटा सकेंगे।
प्रधानमंत्री ने कैबिनेट मंत्रियों से कनिष्ठ मंत्रियों की भूमिका को प्रभावी बनाना सुनिश्चित करने को कहा था। कैबिनेट मंत्रियों को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा था, "मैं उम्मीद करूंगा कि आप लोग अपने मंत्रालय के कनिष्ठ मंत्रियों को उचित जिम्मेदारी देंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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