शुरुआती वर्षो में बसु ने की उद्योगों की अनदेखी : अर्थशास्त्री
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक बसु के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में शानदार प्रगति हुई लेकिन मजदूर संघों के वर्चस्व के चलते यहां से उद्योगों का पलायन हुआ और बेरोजगारी बढ़ गई। उन्हें अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में औद्योगिक परियोजनाओं के महत्व का अहसास हुआ।
बसु का रविवार को निधन हो गया है। वह जून 1977 से नवंबर 2000 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे।
अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार कहते हैं, "उनकी आर्थिक नीतियां पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित थीं। उन्होंने 1990 के मध्य तक औद्योगीकरण की कोई परवाह नहीं की थी।"
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल को मजदूर संघों ने उग्र रवैये और वर्चस्व, बंद व घेराव के लिए याद किया जाएगा।
सरकार ने आईएएनएस से कहा, "ग्रामीण क्षेत्र उनकी ताकत थी। उनकी सरकार की तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियां-भूमि सुधार, गरीबों का सामाजिक सशक्तिकरण और खाद्यानों के उत्पादन में वृद्धि रही।"
उन्होंने कहा, "उनके कार्यकाल का दूसरा पहलू यह है कि उन्होंने उद्योग क्षेत्र की पूरी तरह से अनदेखी की। उनके समय में काम करने की संस्कृति का लगातार क्षरण हुआ। राज्य में मजदूर संघों और बंद की राजनीति का बोलबाला रहा था।"
इसके परिणामस्वरूप लोगों ने काम के लिए राज्य से बाहर जाना शुरू कर दिया, फैक्ट्रियां बंद होने लगीं और बेरोजगारी बढ़ी।
यद्यपि बसु की सरकार और उनकी पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्र के लिए बहुत काम किया और उनके कार्यकाल में कृषि का खूब विकास हुआ।
अर्थशास्त्री दीपांकर दासगुप्ता ने कहा, "उनकी कृषि नीति उल्लेखनीय थी। उनके भू सुधार अधिनियम ने सकारात्मक बदलाव किए। उन्होंने सम्पत्ति अधिनियम 1955 की कमियां दूर की। उनके भूमि हदबंदी कानून से किसानों को मदद मिली।"
भूमि हदबंदी कानून के तहत कोई भी व्यक्ति 25 एकड़ से अधिक भूमि का मालिक नहीं हो सकता था। यदि किसी के पास इससे अधिक भूमि होती थी तो उसे अन्य किसानों में बांट दिया जाता था।
सरकार कहते हैं, "वर्ष 1995 में औद्योगिक नीति लागू होने पर पूरा परिदृष्य एकदम बदल गया। इस समय सरकार ने महसूस किया कि कृषि की अपनी सीमाएं हैं और केवल इसके आधार पर राज्य की अर्थव्यवस्था कायम नहीं रह सकती।"
उन्होंने कहा कि भूमि सुधार कार्यक्रम 'ऑपरेशन बर्गा' से न केवल ग्रामीण आबादी की आर्थिक स्थिति सुधरी बल्कि इससे राज्य के कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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